कलेक्ट्रेट के कार्यालयों में आरओ प्लांट का पानी पहुंचाने निकला ठेला चालक।
स्वस्थ रहने के लिए अगर आप घर में आरओ प्लांट का पानी मंगवा रहे हैं तो भी कोई जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह शुद्ध ही हो। वजह यह कि आरओ प्लांट के नाम पर पानी का धंधा करने वालों में सो दो को छोड़कर किसी के भी पास लाइसेंस नहीं है।
लाइसेंस के लिए मानक पूरा किए बिना ही आरओ प्लांट संचालक पानी का धंधा शुरू कर दिए हैं। पूर्व में खाद्य विभाग की ओर से दो प्लांटों से लिया गया पानी का सैंपल जांच में फेल हो चुका है। बावजूद इसके भी यह अवैध धंधा जिले में खूब फलफूल रहा है।
तेजी से बढ़ते प्रदूषण के चलते बोरिंग का पानी भी अप स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित नहीं रहा। सप्लाई के पानी से पहले ही लोगों का भरोसा उठ चुका है। ऐसे में शुद्ध पानी के लिए लोग आरओ प्लांट का पानी खरीद रहे हैं।
लोगों की बढ़ती मांग को देखते तेजी से आरओ प्लांट खुल रहे हैं। मौजूदा समय में जिले में तकरीबन 60 से अधिक आरओ प्लांट स्थापित हो चुके हैं। खास बात यह कि धरती का सीना चीर कर भूगर्भ जल का दोहन कर उसका व्यवसाय करने वाले आरओ प्लांट संचालक कोई रायल्टी भी जमा नहीं करते। बिना रायल्टी जमा किए ही वे प्राकृतिक संपदा का दोहन कर रहे हैं।