बीज पर मिलने वाले अनुदान का किसान इंतजार ही करते रहे और इसके लिए शासन से मिला तकरीबन 48 लाख का बजट वापस कर दिया गया। बीज वितरण करने वाली एजेंसी पीसीएफ और कृषि विभाग के अधिकारी इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
इस बात की जानकारी होने पर जिलाधिकारी ने दोनों विभागों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई तो अब शासन से दोबारा धन वापस लाने के लिए भाग दौड़ शुरू कर दी गई है।इससाल सरकारी बीज गोदामों से किसानों को बाजार रेट पर गेहूं का बीज दिया गया था।
किसानों को इस बात का भरोसा दिया गया था कि अगर कृषि विभाग में उनका पंजीकरण हुआ है तो बीज पर मिलने वाली सब्सिडी की धनराशि उनके बैंक खाते में भेज दी जाएगी।
बीज वितरण एजेंसी पीसीएफ ने इस साल विभिन्न ब्लाकों में 4800 कुंतल बीज का वितरण किया था। किसानों ने इस बीच के तीन हजार रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीदा था।
प्रति कुंतल किसानों को दो हजार रुपये बतौर सब्सिडी उनके बैंक खाते में भेजी जानी थी। किसनों गेहूं की बुवाई की और गेहूं की मड़ाई भी हो गई लेकिन अनुदान का पैसा उनके खाते में नहीं पहुंचा।
इधर बीच किसान अनुदान राशि के लिए हल्ला मचाना शुरू किए तो पता चला कि बीज सब्सिडी का तकरीबन 48 लाख रूपया वित्तीय वर्ष समाप्ति के दिन शासन को लौटा दिया गया।
किसान सब्सिडी के पैसे का इंतजार ही करते रह गए और उनके हिस्से की एक बड़ी रकम सरकार को वापस कर दी गई। यह हाल तब है जब जिले के किसान कभी ओलावृष्टि तो कभी सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं।
शाहगंज के किसान ब्रह्मप्रकाश मिश्र, तरसावा के रामसेवक यादव, इंद्रप्रकाश मिश्र, खलीलपुर के देवी सिंह, बरसठी के जगदीश प्रसाद, अमलदार सिंह समेत कई अन्य किसानों का कहना है कि वे सब्सिडी का पैसा खाते में आने का इंतजार कर रहे थें।
अब पता चल रहा है कि उनके हिस्से की धनराशि सरकार को वापस कर दी गई। यह किसानों के साथ अन्याय है। इस संबंध में पीसीएफ प्रबंधक विनोद कुमार का कहना है कि अनुदान का राशि कृषि विभाग को देनी थी। यहां से किसानों का विवरण कृषि विभाग को उपलब्ध करा दिया गया था।