बरसठी। भगेरी गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बृहस्पतिवार को कथा व्यास विद्याधर दास महाराज ने राजा परीक्षित के जीवन प्रसंग का वर्णन सुनाया। कथा के दौरान भक्ति गीतों और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा व्यास ने राजा परीक्षित की कथा सुनाते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में समय रहते धर्म, सत्कर्म और सदाचार को अपनाना चाहिए। राजा परीक्षित ने जीवन के अंतिम समय में सांसारिक मोह-माया से स्वयं को अलग कर भगवान की शरण ले लिया। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मनुष्य को जीवन और मृत्यु के सत्य का बोध कराती है। अहंकार, लोभ और मोह से दूर रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक धन उसके अच्छे कर्म और संस्कार हैं। धन-संपत्ति जीवन में स्थायी नहीं होती लेकिन व्यक्ति द्वारा किए गए अच्छे कार्य समाज में लंबे समय तक याद किए जाते हैं। माता-पिता, गुरु, बुजुर्ग और जरूरतमंदों का सम्मान करना ही सच्ची भक्ति है। यदि श्रीमद्भागवत से मिले संस्कारों को परिवार और समाज के जीवन में उतारा जाए तो आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बढ़ेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्य के मार्ग पर चलने, जरूरतमंदों की सहायता करने और दूसरों के प्रति दया एवं करुणा रखने का आह्वान किया। कथा के समापन पर भगवान के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लिया और प्रसाद ग्रहण किया। मुख्य यजमान शिवशंकर दुबे, एसओ विष्णुकांत दुबे, संतोष दुबे, गौरव, दीपक तिवारी, मिथिलेश पांडेय मौजूद रहे।