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ईश्वर के प्रति समर्पित होने से मनुष्य की भक्ति सार्थक होती है : बालकृष्णाचार्य

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थानागद्दी।- कथा कहते कथा वाचक। संवाद
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थानागद्दी। केराकत के सोहनी पांचों गांव में चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन बुधवार की शाम को कथाव्यास बालकृष्णाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला और रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूब गए। कथाव्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला को सांसारिक दृष्टि से नहीं, बल्कि जीव और परमात्मा के आध्यात्मिक मिलन के रूप में समझना चाहिए। मनुष्य जब सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर के प्रति समर्पित होता है, तभी उसकी भक्ति सार्थक होती है। रुक्मिणी विवाह प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानती थीं। उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था। इससे चिंतित रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर उनसे अपने उद्धार की प्रार्थना की। रुक्मिणी की भक्ति और विश्वास से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण उन्हें लेने पहुंचे और अपने साथ ले गए। रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान कथा पंडाल जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा। आयोजक सतीश गुप्ता ने कथा में शामिल हुए श्रद्धालुओं का आभार जताया।
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