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150 से 200 ग्राम पंचायतों का बदल सकता है आरक्षण

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जौनपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में कोर्ट के फैसले के बाद जिले में प्रधान पदों के सीटों के आरक्षण पर व्यापक फेरबदल की संभावना है। वर्ष 2015 के मानक को आधार बनाकर निर्धारण से 150 से 200 ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदल सकता है। सबसे ज्यादा प्रभावित वह ग्राम पंचायतें होंगी, जिन्हें अनुसूचित जाति या अनारक्षित श्रेणी में रखा गया है। हर ब्लाक में 8-10 गांव इसके बदल सकता है।
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जिले में प्रधान पद के लिए तीन मार्च को आरक्षण की सूची प्रकाशित की गई थी। इसमें कुल 1740 ग्राम पंचायतों में से 138 अनुसूचित जाति महिला, 245 अनुसूचित जाति, 145 अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, 311 अन्य पिछड़ा वर्ग, 283 महिलाओं के लिए आरिक्षत था। शेष 398 गांव अनारक्षित थे। यह आरक्षण नए नियमों के आधार पर हुआ था। इसमें उन ग्राम पंचायतों को आरक्षित कर दिया गया था, जो कब आबादी के कारण अब तक उस श्रेणी के लिए आरक्षित नहीं हुई थीं। इससे तमाम दावेदारों के मंसूबे टूट गए थे। सबसे झटका उन सीटों के दावेदारों को लगा था, जिनकी सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई थी। इनकी संख्या 200 के करीब है। अब कोर्ट का फैसला आने के बाद वर्ष 2015 के आधार पर सीटों का आरक्षण तय होना है। इसका सबसे अधिक फायदा इन्हीं ग्राम पंचायतों को होगा। सूत्रों की मानें तो हर ब्लाक में पांच से 8-10 ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदल जाएगा।
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गाइड लाइन अभी नहीं आई है, लेकिन अगर वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण हुआ तो निश्चित ही कई ग्राम पंचायतों का आरक्षण बदलेगा। इसकी तस्वीर तभी साफ हो पाएगी, जब शासन से गाइड लाइन आएगी। -संतोष कुमार, जिला पंचायत अधिकारी।
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