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मजहब किसी भाषा को सीखने से नहीं रोकता: खालिद रशीद

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खेतासराय। ऐशबाग ईदगाह इमाम लखनऊ व पर्सनल बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता के साथ ही नौनिहालों को संस्कार भी जरूरी है। सभ्य समाज का निर्माण तालीम के ही बदौलत हो सकता है। संविधान और मजहब किसी भी भाषा को सीखने से नही रोकता है। समाज में बदलाव के लिए शिक्षण संस्थानों का खोला जाना आवश्यक है।
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वह रविवार को गोरारी स्थित आसमा काॅलेज के सालाना जलसे में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मायूसी से किसी भी समस्या का निदान नही होता है। अशिक्षा सभी कौमों में है। बच्चों में प्रतियोगिता का माहौल पैदा करना चाहिए। जिससे वह देश की सेवा में अपना अहम योगदान दे सकें ।

विशिष्ट अतिथि विधायक नफीस अहमद ने कहा कि समाज में फैली कुरीतियों को शिक्षा ही रोका जा सकता है। समारोह को पूर्व मंत्री मुईद अहमद, केजीएमयू लखनऊ के प्रो. कौशर उस्मान, वसीम अहमद, अशफाक अहमद ने भी संबोधित किया। इससे पूर्व छात्रों ने संस्कृति कार्यक्रमों की प्रस्तुति से सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया। अध्यक्षता मौलाना वहीद कासमी ने की। इस मौके पर मौलाना सुफियान निजामी, हम्माम वहीद, अरशद आजमी, तौकीर सिद्दीकी, आदिल प्रधान, अदनान खान, इरफान अहमद, डॉ. वकील, बेलाल जावेद आदि शामिल रहे।
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