सीटेट की परीक्षा देने के लिए कतार में खड़े अभ्यर्थी। संवाद
मल्हनी। सीटेट (सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) शनिवार को कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ। दूर दराज से आए अभ्यर्थी सुबह ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि संवेगात्मक और तार्किक सवालों ने काफी उलझाया। पुलिस-प्रशासन से जुड़े सवालों ने भी परेशान किया। अभ्यर्थियों ने बताया कि सीटेट में पुलिस प्रशासन के साथ-साथ नई शिक्षा नीति से संबंधित घुमावदार सवाल भी पूछे गए। ऐसे सवाल अभ्यर्थियों के लिए उलझाऊ बने रहे। कुछ अभ्यर्थियों के पल्ले ही नहीं पड़े। उनका कहना था कि उन्हें आभास ही नहीं था कि इस तरह के सवाल भी सीटेट परीक्षा में पूछे जाएंगे। कुछ अभ्यर्थियों ने पेपर को मध्यम दर्जे का तो कुछ ने उलझाने वाला बताया। पुलिस से जुड़े सवालों को लेकर भी चर्चा रही। परीक्षा देकर निकले गुरुजनों का छलका दर्द: सरकारी अध्यापकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू होने के बाद इसे पास करना अब एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। शनिवार को आयोजित सीटेट में शामिल होने पहुंचे कई अध्यापकों के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दिया। परीक्षा देने आए अध्यापक अरविंद कुमार ने बताया कि इस बार का पेपर कठिन था और समय प्रबंधन सबसे बड़ी समस्या बनकर सामने आया। उन्होंने बताया कि सरकारी सेवा में होने के बावजूद टेट और सीटेट की अनिवार्यता ने मानसिक दबाव बढ़ा दिया है। शिक्षक श्यामलकांत ने कहा कि कई प्रश्न ऐसे थे, जिनमें विकल्प बहुत नजदीकी थे। इससे सही उत्तर चुनना मुश्किल हो गया।