13- बक्सा क्षेत्र के सरायहरखू गांव में श्री सीताराम धर्म मंण्डल द्वारा स्थापित रामलीला का स्थायी ?
- फोटो : JAUNPUR
बक्शा। स्थानीय विकास खंड के सरायहरखू गांव की रामलीला की रामलीला इस साल 4 अक्तूबर से शुरू हो रही है। रामलीला के लिए अगले सप्ताह से परदेशियों का गांव आना शुरू हो जाएगा। 1932 में शुरू हुई सरायहरखू की रामलीला की ख्याति दूर-दूर तक है। अधिकतर लोग सरकारी सेवा में हैं। जो रामलीला के लिए छुट्टी लेकर गांव आ जाते हैं।
1932 में यहां सीताराम धर्ममंडल की स्थापना हुई थी। गांव के जयंत्री प्रसाद, प्रकाशनाथ श्रीवास्तव और प्रेमनाथ श्रीवास्तव ने यहां रामलीला की शुरुआत की थी। कायस्थ बिरादरी के लोग ही प्रभु की लीला करते हैं। तब से कायस्थ समाज के लोग ही लीला करते आ रहे हैं। उच्च पदों पर कार्यरत लोग यहां रामलीला में स्वरूप बनने मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, बेंगलूरू , लखनऊ आदि शहरों से यहां आ जा जाते हैं। रामलीला के लिए सभी लोग छुट्टी लेकर घर आ जाते हैं। दशहरे तक गांव में उत्सव जैसा माहौल रहता है। इनके नात रिश्तेदार भी गांव में आ जाते हैं। इस साल रामलीला समिति के कार्यकारिणी व मंडल अध्यक्ष अरुण कुमार श्रीवास्तव व कौशल कुमार सिन्हा व मंत्री जीतेंद्र श्रीवास्तव की देख रेख मे सम्पन्न होगा । समिति के मंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि लीला की परंपरा कायम है। लीला से जुडे़ लोग उच्च पदों पर हैं लेकिन वे लीला के समय गांव गांव आ जाते हैं।
लीला के प्रबंधक से लेकर स्वरूप तक इंजीनियर, डाक्टर, पीसीएस अधिकारी हैं। लिहाजा रामलीला की तैयारियों की बैठक भी उनमें से किसी न किसी के कार्यस्थल पर होती है। रामलीला के समय सब गांव में जुट जाते हैं।
रामलीला मंच से गहरी आस्था
बक्शा। सरायहरखू की रामलीला के लिए गांव में श्री सीताराम धर्म मंडल द्वारा स्थाई मंच का निर्माण कराया गया है। इस मंच की मान्यता किसी मंदिर से कम नहीं है। यहां पर लोग मनौती भी मनाते हैं और शादी विवाह भी यहां लोग करने आते हैं।