बेमौसम बारिश रविवार को एक बार फिर किसानों पर कहर बनकर टूटी है। बारिश ने तेजी से मड़ाई के काम में लगे किसानों का काम रोक दिया। खेत और खलिहान में गंहूं की फसल भीग गई। खेत में पककर तैयार गेहूं की फसल को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। पिछली बारिश में जो फसलें खेत में लोट गई थीं उन्हें पूरी तरह से चौपट होने का खतरा बढ़ गया है। उधर, बक्शा ब्लाक के बेलावा गांव में खेत में मड़ाई का काम कर रही मिहला की आकाशीय बिजली से झुलस कर मौत हो गई।
दोपहर 12:30 बजे तक रुक-रुककर बरसात होती रही। तेज हवा के साथ हो रही बेमौसम बारिश के कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बारिश से आम की फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। शनिवार देर रात से ही आसमान में बादलों की उमड़ घुमड़ शुरू हो गई थी। तकरीबन 10 बजते-बजते बारिश शुरू हो गई। जगह जगह खेतों के साथ ही शहर के निचले इलाकों में भी पानी लग गया। इससे राहगीरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उधर बारिश के साथ हवाओं से किसानों को आशंका सताने लगी कि कहीं बची.खुची फसल भी चौपट न हो जाए।
अभी एक महीने के भीतर तीसरी बार बेमौसम बारिश ने खेती को चौपट कर दिया है। पिछले पखवारे में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश ने गेहूं चना और अरहर की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया था। कृषि विभाग पिछली बारिश में पहले ही 10 से 15 फीसदी तक उत्पादन गिरने का अनुमान लगा चुका है। खुटहन के किसान राजदेव यादव का कहना है कि अब गेहूं काला पड़ जाएगा। मंडी में किसानों को उसकी वाजिब कीमत नहीं मिल सकेगी।
बक्शा के किसान राजबहादुर ने कहा कि अभी तक तो बहुत कुछ नहीं बिगड़ा था लेकिन रविवार की बारिश ने किसानों को काफी मायूस कर दिया है। अब नहीं लगता कि किसानों की मेहनत की लागत भी निकल पाएगी। खेती चौपट हो चुकी है। संतोष के लिए उसकी मड़ाई तो करनी ही होगी।
कृषि उपनिदेशक अशोक कुमार उपाध्याय ने बताया कि बेमौैसम बारिश से अबतक 10 से 15 फीसदी कृषि उत्पादन प्रभावति होने का अनुमान है। प्रभावित उत्पादन के सही आकलन के लिए सर्वे कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो किसान बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाए होंगे उन्हें फसल बीमा योजना का लाभ मिलेगा। जो किसान अप्रैल में भी किसान क्रेडिट कार्ड बनवा लेंगे उन्हें भी बारिश से हुई क्षति का मुआवजा मिलेगा। सरकार की ओर से अभी तक कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है।