स्वामी अड़गड़ानंद महराज ने कहा है कि हर जीव एक परमात्मा की संतान है। जिस परिवार का एक व्यक्ति परमात्मा से जुड़ जाता है उसका कुल धन्य हो जाता है। बिना भजन से ईश्वर के दर्शन नहीं होता है। वह रविवार की दोपहर घोसाव गांव स्थित अरविंद सिंह के आवास पर श्रद्धालुओं के बीच प्रवचन कर रहे थे।
प्रवचन का रसपान कराते हए स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा कि भजन में तमाम ऐसे सवाल है जो पूछे नहीं जाते। बहुत से उत्तर भी ऐसे हैं जो बताए नहीं जा सकते। भजन एक ऐसा आत्मीयता भरा गीत है जो ईश्वर और मनुष्य के बीच की दूरी को और करीब ला देता है। उन्होंने कहा कि घर पर आए हुए मेहमान को कभी लौटाना नहीं चाहिए। यह तो भगवान का रूप होते हैं। साथ ही अतिथि देवो भव: को सार्थक करते हैं।
वह इंसान धन्य है जिसके घर भगवानरूपी मेहमान पधारा और उसने उसका आतिथ्य सत्कार किया। कहा कि गीता के अनुसार मनुष्य आचरण करे तो निश्चित रूप से उसका मोक्ष हो जाता है। माया में कोई ऐसी ताकत नहीं होती है जो मानव का नुकसान कर दे। गीता भगवान के मुख की वाणी है। अगले जन्म में साधना जहां से छूटी है वहीं से शुरू हो जाती है। गीता को पढ़ने से मानव के हर सवाल का जवाब मिल जाता है।
महाराज ने भक्तों को हिदायत दी कि गीता के पढ़ने से जीवन में भटकाव नहीं होता है। गीता हमारा धर्मशास्त्र है। रोज सुबह-शाम आधा घंटा अध्ययन करना चाहिए। ताकि दुनिया की सभी बुरी आदतों से बचा जा सके। प्रवचन के दौरान माला सिंह, शैलेंद्र कुमार सिंह, विनय कुमार दुबे, रामचंद्र सिंह, मनोज दुबे, लाल प्रताप सिंह आदि मौजूद थे। आयोजक संजय सिंह ने आभार जताया।