जिले के कद्दावर नेता पारसनाथ यादव कैबिनेट मंत्री तो बने रहेंगे लेकिन उनके पास कोई विभाग नहीं होगा। इसकी औपचारिक घोषणा होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। कैबिनेट मंत्री जमीनों पर कब्जा करने के मामले में
चर्चा में आए थे। राज्यपाल से 27 और 30 जुलाई को मिलकर मर्दानपुर निवासी ऊषा मौर्या ने आरोप लगाया था कि कैबिनेट मंत्री और उनके पुत्र भू माफियाओं को शरण दे रहे हैं। फर्जी पेपर तैयार कराकर बेनामी संपत्ति औने पौने
दाम पर खरीद रहे हैं। राज्यपाल ने एक अगस्त को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा था। 23 सितंबर और 30 सितंबर को भी राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा। राज्यपाल के कहने पर मुख्यमंत्री ने एक
अक्तूबर को ऊषा मौर्या को अपने आवास पर बुलाकर उनकी समस्या सुनी। 26 अक्तूबर को ऊषा मौर्या ने फिर राज्यपाल को पत्र लिखा कि सुनवाई नहीं हो रही है। पंचायत चुनाव के दौरान बदलापुर की एसडीएम ममता मालवीय की गाड़ी से एक
युवक को जबरन उतार ले जाने की जानकारी भी खुफिया एजेंसियों ने मुख्यमंत्री को दी थी। कई अन्य मामलों में भी सपा के ही लोगों ने मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की थी। हालांकि इस संबंध में कुछ भी कहने से कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव इनकार कर रहे हैं।