जौनपुर। पूविवि के 24वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने विद्यार्थियों को जीवन पथ पर सफलता के सूत्र दिए। सनातन संस्कृति की विरासत के अनुरूप व्यक्तित्व का निर्माण कर देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्य के निर्वहन की प्रेरणा दी। इसके लिए उन्होंने नई शिक्षा नीति को प्रमुख आधार बताया। लड़कियों को गलत कार्यों के प्रति मुखर होने की भी अपील की। कहा कि महिलाएं सिर्फ उत्पीड़न सहने और प्रताड़ना झेलने के लिए नहीं बनी हैं। अब सोच बदलने की जरूरत है। महिलाओं के कारण ही परिवार आगे बढ़ रहा है। जिनके घर में मां नहीं, उन परिवारों में बच्चों का बेहतर विकास नहीं हो पाता।
करीब 35 मिनट के संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि उपाधि पाने वाले सभी छात्र-छात्राओं ने कठोर परिश्रम व सतत अध्ययन से एक महत्वपूर्ण मंजिल पार की है। वह जीवन का स्वर्णिम अध्याय प्रारंभ कर रहे हैं। जीवन में उच्च आदर्शों को प्रतिस्थापित करते हुए दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ें। साहस के साथ कठोर परिश्रम करने के लिए आप तैयार रहें। जिस तरह फूल उदारता के साथ मुक्त भाव से सुगंध को बांटता है उसी तरह राष्ट्र के उपवन में अपनी खुशबू से सबको सुगंध और शांति दें। गुणवान होने के साथ गुणित बनें। गुणित व्यक्ति जीवन पथ पर सदैव उच्च शिखर को प्राप्त करता है। हमारे पूर्वजों ने मानव सेवा को मनुष्य जीवन का ध्येय माना है। भगवान राम की मर्यादा, चेतना, कृष्ण की अनाशक्ति, बुद्ध की करुणा, महावीर व गांधी की अहिंसा और शंकराचार्य की तपोधारणा ग्रहण करें। महानता के उच्चतम आदर्शों का पालन करने के लिए अपने मन में सत्य, प्रेम, दया, क्षमा, त्याग और सहिष्णुता के लिए दृढ़ संकल्प लें। उन्होंने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए नई शिक्षा नीति को बढ़ावा देने की जरुरत बताई। कहा कि इससे देश को बड़ी संख्या में आदर्शवाद और प्रतिभाशाली युवा उपलब्ध हो सकेंगे। नई शिक्षा नीति राष्ट्रीय चरित्र निर्माण, नैतिक उत्थान व तकनीकी क्रांति को बढ़ावा देता है। विद्यार्थियों में नैतिक विकास के लिए नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। कहा कि सत्य, प्रेम, अहिंसा, त्याग, ईमानदारी, अहिंसा, दया, करुणा, कर्तव्पालन, क्षमाशीलता, उत्तरदायितव की भावना जैसी नैतिक मूल्यों को अपनाकर विद्यार्थी नैतिक विकास कर सकता है। भारत को उन्नत राष्ट्र बनाने और बनाए रखने में अपना योगदान दें।
नौकरी देने वाले उद्यमी बने, नौकरी ढूंढने वाले नहीं: प्रो. पंजाब सिंह
जौनपुर। पूविवि के 24वें दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विवि के कुलाधिपति प्रो. पंजाब सिंह ने युवाओं को देश की ताकत बताया है। कहा कि न्यू इंडिया के स्लोगन के साथ भारत एक बार पुन: अपनी खोई हुई ताकत को प्राप्त करना चाहता है। यह युवाओं के बल पर ही संभव है। युवाओं के मामले में हम विश्व के सबसे समृद्ध देश हैं। युवाओं में ऊर्जा है, उत्साह है, उमंग है, उत्सुकता है, असीमित संभावनाओं से युक्त कल्पनाओं की उड़ान है। सपनों को देखने और पूरा करने की हिम्मत है। भारत सरकार की नई शिक्षा नीति देश के युवाओं में उड़ान भरने के लिए पंख लगाने एवं पुराने गौरव प्राप्त करने का प्रयास है। हमें अपने युवा पीढ़ी को सही मायने में शिक्षित करना होगा। उन्हें किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर व्यावहारिक ज्ञान की सीमाओं तक लाना होगा। हमारा युवा नौकरी देने वाले उद्यमी बने, न कि नौकरी ढूंढने वाला। उन्होंने कहा कि एक समय था, जब देश में अन्न की कमी थी, मगर अब हम पड़ोसी देशों का भी पेट भर रहे हैं। देश की जीडीपी में कृषि का 15 प्रतिशत योगदान है वहीं लगभग 50 प्रतिशत रोजगार के अवसर भी यह उपलब्ध कराता है. इसलिए कृषि और कृषक देश में महत्व है। इसे और मजबूत करने से ग्रामीण उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
कोरोना काल में भी विवि ने पाई उपलब्धि
जौनपुर। पूविवि की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने पिछले एक वर्ष विवि की उपलब्धियों और भावी योजनाओं को विस्तार से रखा। बताया कि कोविड काल में भी विवि निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहा। विवि ने शैक्षणिक, प्रशासकीय अनुसंधान, संगोष्ठी, मासिक परिचर्चा, निर्माण, पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रमों के साथसामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्य एवं शासन की मंशानुसार निर्देशित अन्य कार्यों का आगे बढ़कर नेतृत्व किया है। आगे भी वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहेगा।
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कुलसचिव के नेतृत्व में निकली शोभायात्रा
दीक्षांत समारोह की शुरुआत में विवि के विद्वत परिषद की शोभायात्रा निकाली गई। इसका नेतृत्व कुलसचिव महेंद्र कुमार ने किया। शोभायात्रा में अतिथियों के साथ कार्य परिषद् एवं विद्या परिषद के सदस्य शामिल हुए। इस अवसर पर पूर्व कुलपति प्रो. पीसी पातंजलि, प्रो. सुरेंद्र सिंह कुशवाहा, विधायक बृजेश सिंह प्रिंसु, डॉ. लीना तिवारी, प्रो. बीबी.तिवारी, प्रो. मानस पांडेय, प्रो. अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. रामनारायण, डॉ. मनोज मिश्र, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. एके श्रीवास्तव, प्रो. वंदना राय, प्रो. राजेश शर्मा, प्रो. देवराज सिंह, डॉ. विजय सिंह, डॉ. राहुल सिंह, डॉ. राजकुमार, डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. प्रमोद यादव, .अशोक सिंह, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. राकेश यादव, डॉ. जगदेव, डॉ. आशुतोष सिंह, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. विजय प्रताप तिवारी, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. केएस तोमर, मंगला प्रसाद यादव, डॉ. अवध बिहारी सिंह, रामजी सिंह, पीके कौशिक, श्याम श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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गतिमान के आठवें अंक का हुआ लोकार्पण
विवि के 24 वें दीक्षांत समारोह में गतिमान वार्षिक पत्रिका का विमोचन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। पत्रिका में विवि के वर्ष भर की गतिविधियां, स्वर्ण पदक धारकों की सूची, अतिथियों का परिचय समेत विवि की विविध गतिविधियों को प्रकाशित किया गया है। पत्रिका के संपादन मंडल में डॉ मनोज मिश्र, डॉ दिग्विजय सिंह राठौर, डॉ केएस तोमर व डॉ सुनील कुमार शामिल हैं।
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51 विद्यार्थियों को राज्यपाल के हाथों मिला उपहार
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कक्षा 6 से 8 में पढ़ने वाले 51 विद्यार्थियों को स्कूल बैग, फल, महापुरुषों पर प्रकाशित पुस्तक आदि प्रदान किया। इसमें उच्च प्राथमिक विद्यालय करंजाकला, पूर्व मा.वि. मेंहदीगंज मड़ियाहूं, कंपोजिट स्कूल नटौली ब्लाक शाहगंज, पूर्व मा.वि. मिरशादपुर बदलापुर, अंग्रेजी माध्यम कंपोजिट स्कूल बरनपुर, खुटहन की छात्र-छात्राएं शामिल हुई। एनएसएस के समन्वयक डॉ. राकेश कुमार यादव ने इसका संयोजन किया।
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महंत अवैद्यनाथ की मूर्ति का अनावरण
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विवि में स्थित महंत अवैद्यनाथ संगोष्ठी भवन परिसर में गोरक्षपीठ के पूर्व पीठाधीश्वर ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ की मूर्ति का अनावरण किया। इस अवसर पर दीक्षांत समारोह के कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य, कुलसचिव महेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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स्नातक में इन्हें मिला गोल्ड मेडल
बीटेक मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मयंक सिंह, बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में प्रिया मिश्रा, बीटेक इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन में तेजस्विनी गोस्वामी, बीटेक इनफार्मेशन टेक्नोलाजी में आकाश चौहान, बीटेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रियंका यादव, बी फार्मा में आरती प्रजापति, बीए में पूजा सिंह, बी0एससी में सूर्यकांतेश चौहान, बी.काम. में शिव शक्ति, बीएससी कृषि में आकांक्षा यादव, बीपीई में अरुंधति सिंह, बी.एड. में पूनम, एलएलबी में शशांक मिश्र, बीसीए में गौतम पांडेय, बीबीए में तन्मय कृष्ण सर्राफ को स्वर्ण पदक मिला।
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परास्नातक में इन्हें मिला गोल्ड मेडल
एम.सी.ए. में आदिल खान, एमबीए ई-कामर्स में आनंदिका यादव, एमबीए में सिद्धार्थ मौर्या, एमबीए एग्रीबिजनेस में रवि कुमार अग्निहोत्रीक, एमबीए बिजनेस इकोनॉमिक्स सलोनी सिंह, एमबीए एमएफसी में प्रवाल कपूर, एमबीए एचआरडी में करन प्रताप सिंह, एमएससी बायोकेमिस्ट्री में तृप्ति श्रीवास्तव, एमएससी माइक्रोबायोलाजी में ऋतुराज पटेल, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी इस्मत बकर, एमएससी पर्यावरण विज्ञान में आस्था मौर्या, एमएससी रसायन विज्ञान िमें प्रतिभा पटेल, एमएससी पृथ्वी एवं ग्रह विज्ञान में मो0 तैय्यब, एमएससी गणित में श्रेया यादव, एमएससी भौतिक विज्ञान में विवेक कुमार श्रीवास्तव, एमए व्यावहारिक मनोविज्ञान में शमा बानो, एमए मास कम्यूनिकेशन में सौम्या तिवारी, प्राचीन इतिहास में आरती आनंद, सैन्य विज्ञान में प्रशांत चौरसिया, अर्थशास्त्र में प्रियंका उपाध्याय, शिक्षाशास्त्र में नेहा व प्रिया सिंह, अंग्रेजी में सिम्पी मिश्रा, भूगोल में जागृति गुप्ता, हिंदी में गौरव सिंह, संगीत में सुशील सिंह, गृह विज्ञान फ़ूड एंड न्यूट्रिशन में आंचल मिश्रा, गृह विज्ञान ह्यूमन डेवलपमेंट मे डिंपल कुशवाहा, मध्यकालीन इतिहास में कृतिका कुमारी व संजीव कुमार, संगीत गायन में नीलू यादव, दर्शनशास्त्र में नगमा खातून, राजनीतिशास्त्र में शाम्भवी सिंह, संस्कृत में प्रांशु सिंह, समाजशास्त्र में दिनेश, उर्दू में गजाला, मनोविज्ञान मे प्रियंका पांडेय, एमएड में गुंजन यादव, एम काम में सत्या व भारती चौरसिया, वनस्पति विज्ञान में सोनू यादव, रसायन विज्ञान में काव्य चंदन, औद्योगिक रसायन पूजा गुप्ता, गणित में रश्मि, भौतिक विज्ञान में अभिनव सिंह व मुकेश यादव, जंतु विज्ञान में पूनम यादव, एनिमल हस्बेंड्री एंड डेयरी में नवीन कुमार, एमएससी कृषि में प्रिया सिंह, जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग में शारदा सुमन, हार्टिकल्चर में निकिता, प्लांट पैथोलाजी में शुभम पटेल, एग्रोनामी में दीपा कुशवाहा, एग्रीकल्चर केमिस्ट्री एंड स्वायल साइंस में मनीष कुमार, कीट विज्ञान में आकांक्षा देवी, एग्रीकल्चर एक्सटेंशन में प्रदीप यादव, एलएलएम में निशा बानो को स्वर्ण पदक मिला।
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67 शोधार्थियों को मिली शोध उपाधि दीक्षांत समारोह में विभिन्न संकायों के 67 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। इसमें कला संकाय के 39, विज्ञान संकाय के 15, शिक्षा संकाय के 10, कृषि संकाय के 01, विधि संकाय के 02 शोधार्थियों को उपाधि मिली।