वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता को सुधारने और शोधार्थियों को प्रैक्टिकल की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय में आधुनिक उपकरणों से युक्त प्रयोगशाला का निर्माण कराया जाएगा।
इसका खाका तैयार कर लिया गया है। शासन से अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। छह माह का कोर्स वर्क करने के बाद छात्रों को एक कामन परीक्षा देनी होगी। परीक्षा में पास होने के बाद ही छात्र शोध का काम
शुरू कर सकेंगे। यदि छात्र परीक्षा में पास नहीं होंगे तो उन्हें छह माह बाद फिर परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा। ऐसी शुरूआत पहली बार किसी विश्वविद्यालय द्वारा किया जा रहा है।
कुलपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने गुुुरुवार को अमर उजाला के साथ खास बातचीत में बताया कि शोध की गुणवत्ता को सुधारना एक बड़ी चुनौती है। कोई भी कदम उठाने से पहले इस बात पर चर्चा करना जरूरी है कि उसमें क्या
दिक्कतें आ सकती हैं। किसी समस्या से निबटने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों के सामने समस्या न आए इसे ध्यान में रखते हुए छात्रों को कोर्स वर्क के दौरान ही हर स्टेप की जानकारी दी जाए।
ताकि रिसर्च वर्क पूरा करने में किसी तरह की कोई दिक्कत न आए। शोध छात्रों को परिसर में रहने की सुविधा भी दी जाएगी। ताकि वह छह माह तक परिसर में रहकर कोर्स वर्क पूरा कर सकें। कुलपति ने बताया कि कोर्स वर्क के
दौरान छात्रों को इतनी जानकारी दे दी जाएगी कि वह रिसर्च कार्य आसानी से पूरा कर सकें। शोध के दौरान गाइड को प्रगति रिपोर्ट भी समय-समय पर विश्वविद्यालय को देनी होगी। शोध की निगरानी के लिए गठित चार सदस्यीय
उपसमिति कोर्स वर्क पर नजर रखेगी। समिति कोर्स की निगरानी कर समय-समय पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। उपसमिति में डा. राकेश सिंह, डा. यूपी सिंह, डा. संगीता साहू समेत चार लोगों को शामिल किया गया है।
पहले सत्र में थोड़ी सी दिक्कत जरूर आएगी। लेकिन बाद में पूरी प्रक्रिया सिस्टम का एक हिस्सा बन जाएगी। उन्होंने कहा कि विषय विशेषज्ञों को कोर्स वर्क की जानकारी दे दी गई है। रिसर्च शुरू होने से पहले वह शोधार्थियों को
क्रमवार जानकारी देंगे। एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि विश्वविद्यालय परिसर और इससे संबद्ध करीब 500 कालेजों में कल्चरल प्रोग्राम कोर्स शुरू किया जाएगा। कालेज विश्वविद्यालय से मान्यता लेकर इस कोर्स का संचालन अपने यहां कर
सकेंगे। इसकी शुरूआत पूर्वांचल परिसर में संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूविवि कैंपस को और बेहतर बनाने का खाका तैयार कर लिया गया है।