जौनपुर। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को दूध-घी वितरण की योजना अब तक शुरू नहीं हो पाई। कुपोषण मिटाने का अभियान सिर्फ गेहूं-चावल, दाल के भरोसे ही चल रहा है। नवंबर में गेहूं-चावल बंटा और अब दिसंबर में दाल का वितरण हो रहा है। दूध-घी पाने के लिए जनवरी का इंतजार करना होगा, जबकि इसका वितरण नवंबर से ही होना था। आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों सहित धात्री व गर्भवती महिलाओं को अब पोषाहार का वितरण नहीं हो रहा है। इसके स्थान पर आपूर्ति कार्यालय से स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गेहूं व चावल बांटने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावां स्वयं सहायता समूहों को खरीद कर दाल बांटने की जिम्मेदारी दी गई है। जिसकी धनराशि शासन से उनके खाते में भेजी जा रही है। जबकि दूध व घी बांटने की जिम्मेदारी पराग को सौंपी गई है। हालत यह है कि जिले में अभी तक दूध व घी बाटने का काम शुरू नहीं हो पाया है। जबकि नवंबर माह से ही दूध व घी बांटने का सरकार ने फरमान जारी किया था। जिले में कुल 5321 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। जिस पर कुल तीन लाख 46 हजार बच्चे हैं। इसमें सात माह से लेकर तीन साल के एक लाख 69 बच्चे हैं। इन बच्चों के साथ ही 73 हजार धात्री व गर्भवती महिलाएं हैं। उन्हें दूध व घी का वितरण नवंबर माह से किया जाना था, जो अभी तक नहीं हो पाया है।जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों सहित धात्री व गर्भवती महिलाओं को नवंबर से दूध व घी बांटने का कार्य पराग कंपनी को सौंपा गया है, लेकिन अभी तक कंपनी की ओर से दूध व घी का वितरण नहीं किया गया है। जनवरी में इसका वितरण शुरू कराया जाएगा। प्रभारी उपायुक्त एनआरएलएम भूपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि दाल का वितरण स्वयं सहायता समूहों की ओर से इस माह से किया जा रहा है। इसके लिए सीधे उनख्ने खाते में धनराशि शासन से आ रही है। जिन महिला समूहों के खाते में शासन से अभी तक धनराशि नहीं आई है, उन्हें रिवाल्विंग फंड से दाल वितरित करने का निर्देश दिया गया है।