जौनपुर। दीपावली पर पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में हम अनभिज्ञ हैं। हम सोचते हैं कि एक दिन पटाखे जलाने से कुछ नहीं बिगड़ने वाला है, जबकि पटाखों से होने वाले प्रदूषणों से मानव जीवन ही नहीं पृथ्वी के अस्तित्व पर भी संकट में हैं। पर्यावरण विज्ञान के शिक्षक दीपक यादव कहते हैं कि दीपावली पर पटाखों से प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इससे पृथ्वी के कवच ओजोन परत को नुकसान पहुंचता है। इसका इसी तरह क्षरण होता रहा तो पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र देव सिंह कहते हैं कि पटाखों से निकलने वाले जहरीले धूएं के चलते कई जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हृदय रोग, फेफड़े, गॉल ब्लैडर, गुर्दे, यकृत एवं कैंसर जैसे रोगों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। हवा के प्रदूषण के अलावा पटाखों से ध्वनि प्रदूषण होता है। कई बार शोर का स्तर सुरक्षित सीमा को पार कर जाता है। नवजात बच्चों और गर्भवती महिलाओं को डराने के साथ यह पशु-पक्षियों तथा जानवरों के लिए भी ठीक नहीं है।
सामाजिक संस्था डीडीएस ग्रुप की संचालिका आरती सिंह पिछले पांच सालों से पटाखों के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं। वह कहती हैं कि वैज्ञानिकों ने भी जब इस बात को सिद्ध कर दिया है कि पटाखे के अनगिनत दुष्परिणाम हैं तो आखिर पटाखे हम क्यों फोड़ें। खास तौर से पढ़े लिखे समाज को इसके लिए आगे आना होगा। पटाखों से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को जागरुक करने वाली संस्था आजाद शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष निसार अहमद कहते हैं कि जो लोग पटाखे फोड़ने के लिए धर्म का सहारा लेते हैं, वे लोग मनोरंजन के आगे मानवता को तुच्छ समझते हैं। कई लोग पटाखे फोड़ने से रोकने के तर्क को अपने धर्म की हानि समझते हैं। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि जब तक हमारी परंपरा और संस्कृति सुरक्षित है हमारा धर्म भी सुरक्षित रहेगा।