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पुलिस ने आरोपी सिपाही और होमगार्ड को भेजा जेल

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जौनपुर। सिपाही को जेल जाने की खबर मिलते ही मुल्ला टोला और आसपास के मोहल्ले के लोग भी अब सिपाही के खिलाफ खुलकर बोलने लगे हैं। लोगों का कहना है कि सिपाही पिछले करीब तीन महीने से अक्सर इसी मोहल्ले में घूमता था। नदी के किनारे से होकर आने जाने वालों की वह जेब तक टोलता था और जेब में पैसा मिलने पर वह ले लेता था। किसी को जेब में दोहरा रखने के नाम पर तलाशी लेता तो किसी को गांजा या तास का पत्ता रखने का शक होने की बात कहकर तलाशी लेता था। अभी मकर संक्रांति के दिन इसी मोहल्ला निवासी रिक्शा चालक का बेटा शक्तिमान नदी के किनारे कटी पतंग उठाने गया तो पुलिस उसे पकड़कर घर ले आई। उसे जुआ खेलते पकडने का आरोप लगाया। बाद में सात हजार रुपये लेकर उसे छोड़ दिया। मुल्ला टोला निवासी एक बुजुर्ग का कहना है कि गिरफ्तार सिपाही का मोहल्ले में आतंक था। नदी में नहाने वालों से भी उसने यह कहते हुए पैसे वसूल किए थे कि उन्होंने नदी को गंदा किया है। उन्हें नदी में प्रदूषण फैलाने के आरोप में जेल भेजने का डर दिखाकर रुपये ऐंठ लिए थे।
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टिकटॉक पर 700 वीडियो बना चुका था राजू
जौनपुर। राजू के पिता असलम व परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि राजू टिकटॉक वीडियो बनाने का शौकीन था। अक्सर वह नदी के किनारे ही अपने दोस्तों के साथ टिकटॉक वीडियो बनाने जाता था। वह करीब सात सौ वीडियो बना चुका था। उसके दो वीडियो पर उसे पैसे भी मिले थे।
राजू (20) पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन वीडियो शूट करने और फोटो एडिटिंग में माहिर था। वह जब भी अपने पिता के साथ मकान की रंगाई के काम से फुरसत पाता था, यही काम करता था। उसके पास कैमरा नहीं था पर कोई किसी कार्यक्रम में बुलाता तो वह साथी से कैमरा लेकर वहां फोटोग्राफी करता था। फोटोग्राफी को ही कैरियर बनाना चाहता था। व्यवहार कुशल भी था। राजू तीन भाई और तीन बहनों में दूसरे नंबर का था। बड़ा भाई इमरान (22) बाबर्ची के साथ रोटी पकाने और सिलाई का काम करता है। छोटा गुलफाम 12 वर्ष का है। राजू का मां आसमां कहती हैं कि वह गरीबी के चलते अपने बच्चों को स्कूल तो नहीं भेज सकीं लेकिन राजू उनकी सभी संतानों में सबसे तेज था।
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बिचौलियों का चेहरा भी होगा बेनकाब
जौनपुर। गिरफ्तार सिपाही की काल डिटेल की जांच से गरीबों को प्रताड़ित कर वसूली करवाने वाले बिचौलियों का नाम भी सामने आ सकता है। मुल्ला टोला के निवासियों का कहना है कि सिपाही अक्सर उनके मुहल्ले में ही रहता था। बिचौलियों के इशारे पर वह लोगों को झूठे आरोपों में पकड़कर ले जाता और रास्ते में ही लेनदेन कर छोड़ देता था। लोग जेल जाने के भय से ब्याज पर रुपये लेकर सिपाही को दे चुके हैं। किसी ने भय के मारे उच्च अधिकारियों से कभी शिकायत नहीं की।
पुलिस के भय से पहले भी हो चुकी है मौत
जौनपुर। जिले में पुलिस की प्रताड़ना के चलते युवक की मौत का कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले 30 नवंबर 2019 को शाहगंज के बड़ागांव में जुआ खेल रहे लोगों को पुलिस ने दौड़ाया तो पुलिस के भय से तालाब में कूदे युवक की मौत हो गई थी। 30 नवंबर को दोपहर बड़ा गांव में शहीद बाबा मजार के निकट कुछ लोग जुआ खेल रहे थे। उसी दौरान पुलिस पहुंची तो जुआ खेलने वाले भागने लगे। पुलिस ने पीछा किया तो गांव निवासी रईस अहमद (35) तालाब में कुद गया। वह तैरना नहीं जानता था और डूब गया। उस दौरान पुलिस पर आरोप लगे थे कि रईस जब तालाब से निकलने की कोशिश कर रहा था तो पुलिस तालाब में
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