जौनपुर। रोक के बावजूद सोमवार को हजारों की संख्या में अजादार ताजिया दफनाने सदर इमामबाड़ा पहुंच गए। ताजिए लेकर आए लोगों की इस भीड़ को देख कर पुलिस के हाथ पांव फूल गए। पुलिस ने रोकने की कोशिश की उनकी ताजियादारों से नोकझोंक भी हुई। इमामबाड़े के बाहर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। प्रशासन ने किसी तरह स्थिति को संभाला। ताजिया दफनाने के बाद लोगों को घर भेज दिया। पूरे घटनाक्रम की प्रशासन ने वीडियोग्राफी कराई है। तनाव को देखते हुए पूरे इलाके में फोर्स लगाई गई है।
कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन ने इस बार सभी सामूहिक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों पर रोक लगा रखी है। मुहर्रम पर इमाम चौक पर ताजिया रखने और जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी। शांति समिति की बैठकों में इस पर सहमति भी बनी थी। लोगों ने घरों में ताजिया रखकर मातम करने की बात कही थी और यही हुआ भी। सार्वजनिक रूप से कहीं अजादारी या मातम नहीं किया गया। दसवीं मोहर्रम पर कहीं भी ताजिया और अलम का जुलूस नहीं निकाला। सोमवार की सुबह अचानक महिलाएं और बच्चे ताजिया लेकर दफनाने पुरानी बाजार स्थित सदर इमामबाड़ा पहुंचने लगे। कुछ ही देर में हुजूम उमड़ पड़ा। हजारों ताजियादारों की भीड़ सदर इमामबाड़ा पर जुट गई। सभी ताजिया लेकर अंदर जाने की कोशिश करने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस-प्रशासन में हड़कंप मच गया। कुछ ही देर में भारी फोर्स मौके पर पहुंच गई। पूरे इलाके को सुरक्षा बल ने घेर लिया। पर भीड़ ज्यादा होने के कारण पुलिस बेबस थी। नियमों का हवाला देकर लोगों को लौटाने की कोशिश की जाने लगी तो ताजियादार हंगामा करने लगे। नोक-झोंक के दौरान किसी ने अफवाह फैला दी। इसके बाद तो लोग पुलिस के प्रति उग्र हो गए। सदर इमामबाड़ा के समक्ष जमकर नारेबाजी की। कुछ ही देर में डीएम दिनेश कुमार सिंह, एसपी अशोक कुमार बड़ी संख्या में फोर्स के साथ सदर इमामबाड़ा पहुंच गए। ताजिया लेकर पहुंचे लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की हिदायत भी दी। इसके बाद क्रमबद्ध ढंग से लोग ताजिया दफन कर वापस लौटे। घटना के बाद तनाव को देखते हुए शहर के पुरानी बाजार, बेगमगंज, रौजा अर्जन, बड़ी मस्जिद, पान दरीबा में फोर्स लगाई गई है। डीएम-एसपी के अलावा मजिस्ट्रेट की टीम ने अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की।
घटनाक्रम की कराई गई वीडियोग्राफी
शासनादेश को न मानते हुए इमामबाड़ा में ताजिया दफन करने की जिद से एकबारगी तनाव की स्थिति बन गई। संयोग रहा कि हालात बिगड़ने से पहले ही प्रशासन ने इसे संभाल लिया। डीएम खुद मोर्चे पर सबसे आगे आए। हर ताजियादार से अनुनय-विनय कर वापस लौटने को कहा। इस दौरान उन्होंने पूरे घटनाक्रम की वीडियोग्राफी कराई। लोगों के नाम पते भी नोट कराए। हिदायत दी कि अगर किसी ने शरारत की तो सबके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कुछ महिलाएं-बच्चे ताजिया लेकर सदर इमामबाड़ा पहुंच गए थे। उन्हें देखकर अन्य लोग भी आ गए। बाद में पुलिस भी पहुंच गई है। मौके पर जाकर सबको समझाया गया। स्थानीय प्रबुद्ध लोगों ने भी इस कार्य में मदद की। लोग वापस घरों को लौट गए हैं। मौके पर शांति व्यवस्था कायम है। कहीं कोई तनाव की स्थिति नहीं है। -दिनेश कुमार सिंह, जिलाधिकारी