जौनपुर। तीन साल में तीन डीएम बदल गए पर ऑटोमैटिक ट्रैफिक सिग्नल वाली एजेंसी फाइनल नहीं हो सकी। शहर के 15 चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं लग पाने के कारण शहरवासी अभी भी जाम से परेशान हैं।
पूर्व जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा के कार्यकाल में तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट देवेंद्र सिंह ने कमिश्नर वाराणसी के यहां फाइल मंजूरी के लिए भेजी। जहां से मार्च 2023 में इसे मंजूरी मिली। योजना के तहत 4.70 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। इसके तहत 15 चौराहों पर ऑटोमैटिक ट्रैफिक सिग्नल लगने हैं। स्मार्ट सिटी वाराणसी की एजेंसी को फाइनल करने के बाद सर्वे का कार्य भी सितंबर 2023 में शुरू हुआ। फिर इसके बाद नए डीएम अनुज कुमार झा ने एजेंसी को पांच साल तक मरम्मत व अन्य सुविधाएं मुहैया कराने को कहा। इसे पूरा करने में एजेंसी ने हाथ खड़े कर दिए। फिर डीएम अनुज कुमार झा ने दिल्ली की नई फर्म को प्रजेंटेशन के लिए आमंत्रित किया था, बातचीत बढ़ ही रही थी तब तक चुनाव से पहले ट्रांसफर हो गया। तभी पूर्व डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ चुनाव से ठीक पहले आए तो उनका पूरा ध्यान लोस चुनाव की तैयारियों व उसे संपन्न कराने पर रहा। इसके बाद उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब नए डीएम डॉ. दिनेश चंद्र के सामने चुनौती होगी कि वह कैसे ऑटोमैटिक ट्रैफिक सिग्नल के प्रस्ताव पर काम करते हैं।
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इन चौराहों पर लगने हैं ट्रैफिक सिग्नल
शहर के सिपाह तिराहा, वाजिदपुर तिराहा, नईगंज तिराहा, मुरादगंज तिराहा, चहारसू चौराहा, लाइन बाजार तिराहा, जेसीज चौराहा, पाॅलिटेक्निक चौराहा, ओलंदगंज चौराहा, कोतवाली चौराहा, आंबेडकर चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लगने हैं।
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कोट
मामला संज्ञान में आया है। दो चार दिन बाद बैठक बुला कर कर इस पर चर्चा की जाएगी। जल्द ही एजेंसी फाइनल कर ट्रैफिक सिग्नल को शुरू कराया जाएगा।
-डाॅ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी