उन्होंने कहा ईश्वर भक्ति ही संसार से उद्धार करने का एक मार्ग है। मनुष्य जन्म लेकर इस माया रूपी संसार में कई बार दिग्भ्रमित होता रहता है। संसार के आवागमन से छुटकारा पाना ही मोक्ष है।
महाराज मुचकुंद ने प्रभु श्री राम से वरदान के रूप मे केवल सत्संग मांगा था। उन्होंने कहा कि राजा हरिश्चंद्र, राजा अमरीष और जन्मेजय संसार में सबकुछ दान देकर अमर हो गए।
भागवत कथा के दौरान मुख्य आयोजक कमलाशंकर दूबे, धर्मेंद्र प्रसाद दूबे, रमेश पांडेय ज्यातिषाचार्य के साथ ही काफी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।