औद्योगिक परिक्षेत्र सतहरिया स्थित एक कोल्ड ड्रिंक बनाने वाली कंपनी का मालिकाना हक स्थानांतरित करने से नाराज कर्मचारी सोमवार को कंपनी में ताला लगाकर धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों का कहना था कि भर्ती के समय कंपनी ने उनके साथ जो सेवा शर्तें रखी थीं, उसे जब तक पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने उनके साथ यह अनुबंध किया था कि जब कभी कंपनी उन्हें निकालेगी या किसी दूसरी कंपनी में शिफ्ट करेगी तो 40 महीने के वेतन का एडवांस भुगतान कर्मचारियों को करेगी। हालांकि कंपनी के अधिकारी कर्मचारियों की नियुक्ति के समय ऐसी किसी सेवा शर्तों की बात से इनकार कर रहे हैं।
कंपनी के कर्मचारी 28 फरवरी को जब काम करने के लिए फैक्ट्री में पहुंचे तो वहां मुख्य गेट पर नोटिस चस्पा किया गया था। उस पर लिखा था कि कंपनी का मालिकाना हक अब वरुण बेवरेज लि. ने ले लिया है। अब कर्मचारियों को नई कंपनी की सेवा शर्तों पर काम करना होगा। नोटिस को देख कर्मचारियों का गुस्सा भड़क गया। कंपनी के सभी प्लांटों में ताला लगा मुख्य गेट पर धरने पर बैठ गए। उनका कहना था कि कंपनी पहले उन्हें 40 महीने के वेतन का भुगतान करे, बाकी का काम उनकी मर्जी पर छोड़ दे।
नई कंपनी वरुण बेवरेज के प्रबंधक रोहित वर्मा का कहना है कि पुरानी कंपनी से उनका क्या अनुबंध है, मुझे नहीं पता। इस फैक्ट्री का मालिकाना हक मेरे पास है तो मेरे साथ काम करने वाले कर्मचारियों का कोई अहित नहीं होगा। उनका पूरा ख्याल रखा जाएगा। धरने में शामिल भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष नीरज श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष ब्रह्मदेव मिश्रा, महामंत्री जार्ज पोल्सन का कहना है कि पुरानी कंपनी पहले कर्मचारियों का भुगतान करे और सेवा शर्त के नियम के तहत भुगतान करे। नई कंपनी नई सेवा शर्तों पर बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी कर रही है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे 12 मार्च से बेमियादी हड़ताल पर चले जाएंगे।
एसओ मुंगराबादशाहपुर श्रीधर पांडेय धरना समाप्त कराने की कोशिश की लेकिन कर्मचारी तैयार नहीं हुए। देर रात तक धरना जारी था। धरने में राममिलन यादव, शिव प्रताप यादव, देवेंद्र प्रताप, शिवकुमार, राजेश शुक्ला, हीरामणि, अशोक मिश्रा, लालमणि, दिनेश तिवारी, रामबाबू, भोलानाथ संजय तिवारी आदि शामिल हैं। उधर मालिकाना हक ट्रांसफर करने वाली कंपनी के लीगल एडवाइजर अकबर खां कहते हैं कि कर्मचारियों के साथ कंपनी का कोई अनुबंध नहीं है। कंपनी उन्हें निकाल भी नहीं रही है। उन्हें हड़ताल खत्म कर देनी चाहिए।