संचारी रोगों से बचाव के लिए चलाया जा रहा संचारी रोग नियंत्रण अभियान महज फाइलों में सिमट गया है। इस अभियान के तहत बहुत से गांवों में न किसी को जागरूक किया गया और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवा का छिड़काव कराया गया।
अधिकतर गांवों में सफाई के लिए तैनात किए गए कर्मचारियों का पता नहीं है। वह कभी कभार गांव में आते हैं, यदि आते भी हैं तो ग्राम प्रधान के यहां हाजिरी लगा कर ड्यूटी पूरी कर लेते हैं। संचारी रोग पर नियंत्रण पाने के लिए राज्यमंत्री ने डीएम और सीएमओ के साथ अभियान का उद्घाटन तो कर दिया लेकिन इसकी जांच नहीं की गई कि अभियान के तहत कहां-कहां सफाई कराई गई, कहां दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है। टीमें किन-किन गांवों में पहुंची हैं। दस दिन बीत गए अभी तक शहर में नालियों की सफाई नहीं कराई जा सकी है। ग्रामीण इलाकों का हालत क्या होगी इसका अंदाजा लगाया सकता है।
क्या है संचारी रोग नियंत्रण अभियान
इस अभियान के तहत दिमागी बुखार और संचारी रोग की रोकथाम के लिए कई विभागों के सहयोग से शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक साफ सफाई कराने, जलभराव वाले इलाकों में एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जाना है। अभियान में पंचायती राज, पशुपालन, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा विभाग, कल्याण समाज, कृषि एवं सिंचाई विभाग सहयोग कर रहे हैं। टास्क फोर्स गठित की गई है जिसमें आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 31 जुलाई तक सभी को जागरूक करेंगे। घर-घर जाकर सफाई, कचरा निस्तारण, जलभराव रोकने, मच्छरों से बचाव आदि की जानकारी देंगी।