रोडवेज बस डिपो में जमीन पर बैठकर बसों का इंतजार करते यात्री। संवाद
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जौनपुर। रोडवेज डिपो में यात्री सुविधाओं का अभाव है। न बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही पेयजल-शौचालय की। यात्रियों को स्टैंड पर दुर्व्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। रविवार को वन रक्षक की परीक्षा देने आए अभ्यर्थी दुर्व्यवस्था से बेहाल नजर आए। बस के इंतजार में घंटों खड़े रहने के दौरान उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जिले में कुल 83 बसें है। रोडवेज बसों से प्रतिदिन लाखों की कमाई होती है। जौनपुर डिपो परिसर में यात्रियों को बैठने के लिए गिनी चुनी ही कुर्सियां लगी हैं। बसों के लेटलतीफ होने पर सिर्फ 17 यात्री यहां बैठ सकते हैं। अन्य यात्री खड़े होकर या नीचे फर्श पर बैठकर बसों का इंतजार करते हैं। गर्मी और बारिश के दौरान यात्रियों को काफी असुविधा होती है। पानी के लिए भी समुचित व्यवस्था नहीं है। रविवार को वन रक्षक की परीक्षा के दौरान प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, आजमगढ़ के अभ्यर्थियों की भीड़ लगी रही, लेकिन उनके लिए पर्याप्त बसें नदारद रहीं। इसके चलते उन्हें काफी देर तक डिपो परिसर में ही खड़ा रहना पड़ा। यात्री दुर्व्यवस्था को कोसते नजर आए।
ग्रामीण डिपो का भी बुरा हाल
मछलीशहर स्थित रोडवेज बस स्टैंड परिसर 65 लाख रुपये लागत लगाकर जीर्णोद्धार कराया गया। बैठने की व्यवस्था की गई है, लेकिन कुर्सी टूट गई है। साफ-सफाई के अभाव में परिसर में गंदगी हैं। रोडवेज की ओर से निर्मित शौचालय में ताला बंद है। मार्ग पर चलने वाली बसें रोडवेज परिसर में आने के बजाय हाईवे से ही निकल जाती हैं। सुजानगंज में बना बस स्टैंड जर्जर अवस्था में है। इसकी स्थिति कई वर्षों खराब है। कई बार स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत संबंधित विभाग से भी की, लेकिन अभी समस्या जस की तस है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों यात्री आते जाते है, लेकिन उनके लिए कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण महिलाओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।