केराकत। नगर सुंदरीकरण की महत्वाकांक्षी योजना बजट के अभाव में अधर में है। प्रमुख चौराहों पर स्थापित महापुरुषों की प्रतिमाएं लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बनी हैं। ऐसे में हमारे 'प्रेरणास्रोत' धूल, धूप और बारिश झेलने को मजबूर हैं।
आठ वर्ष पहले पंडित दीनदयाल नगर विकास योजना के अंतर्गत नगर के प्रमुख स्थानों के सुंदरीकरण के लिए लगभग 60 लाख रुपये की कार्ययोजना बनाई गई थी। योजना के सापेक्ष केवल 20 लाख रुपये ही उपलब्ध हो सके। इसी धनराशि से नगर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद और भगत सिंह की प्रतिमाएं स्थापित कराई गई थीं। प्रतिमाएं स्थापित होने के बाद उम्मीद थी कि इनके संरक्षण और आसपास के क्षेत्र को बेहतर स्वरूप दिया जाएगा, लेकिन आज तक ऊपर छत या शेड की व्यवस्था नहीं हो सकी।
प्रतिमाएं स्थापित होने के बाद उम्मीद थी कि इनके संरक्षण और आसपास के क्षेत्र को एक बेहतर स्वरूप दिया जाएगा, लेकिन आज तक इन प्रतिमाओं पर छत या शेड की व्यवस्था नहीं हो सकी। तपती धूप, भारी बारिश और धूल-मिट्टी के बीच महापुरुषों की ये प्रतिमाएं खुले आसमान के नीचे खड़ी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल सजावट का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण इनकी देखरेख और सौंदर्यीकरण पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
त्योहारों पर माल्यार्पण की रस्म अदायगी, बाकी दिन अनदेखी
नगरवासियों के अनुसार राष्ट्रीय पर्वों और विशेष अवसरों पर केवल माल्यार्पण कर प्रशासनिक अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं। जबकि यहां स्थायी रूप से शेड, समुचित प्रकाश व्यवस्था और नियमित साफ-सफाई की सख्त जरूरत है। समय के साथ प्रतिमाओं के आसपास गंदगी और अव्यवस्था का अंबार लगने लगा है, यहां तक कि कुछ प्रतिमाओं के चबूतरे भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। स्थानीय जनता ने प्रशासन से लंबित बजट जारी कर नगर के सुंदरीकरण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराने की मांग की है।
इस संबंध में विभाग को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। शासन से बजट आवंटित होते ही सुंदरीकरण और प्रतिमाओं के संरक्षण का रुका हुआ कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। — सना सगीर, अधिशासी अधिकारी
केराकत के सिहौली चौराहे पर स्थापित सुभाष चंद्र की प्रतिमा धूल और गंदगी युक्त छत का इंतजार