जौनपुर। नगर के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान प्रसूता की मौत के मामले में जिलाधिकारी ने जांच कर कार्रवाई के आदेश मुख्य चिकित्साधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट को दिया गै। आरोप है कि प्रसूता को आधी रात को जिला महिला चिकित्सालय से एक एसे निजी अस्पताल में भेज दिया गया था जहां बोर्ड पर डाक्टर के नाम और डिग्री तक का उल्लेख नहीं है।
गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के तरसंड गांव निवासी सुरेश सोनकर ने जिलाधिकारी को दिेए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उनकी भांजी हेमा को 12 जुलाई की रात प्रसव पीड़ा होने पर परिजन जिला महिला चिकित्सालय में भर्ती कराए थे। जहां कुछ देर बाद एक नर्स ने उनसे कहा कि रात में यहां कोई डाक्टर नहीं आएंगे। पेसेंट को परेशानी बढ़ सकती है। अगर सुरक्षित प्रसव कराना है तो इन्हं शहर के वाजिदपुर स्थित उनकी पहचान के एक नर्सिंग होम लेकर चले जाइए। नर्स के कहने पर वह प्रसूता को लेकर वे बताए गए श्वेता नर्सिंग होम लेकर गए। जिला महिला अस्पताल से छोड़ते समय एक सादे कागज पर महिला के अंगूठा का निशान भी ले लिया गया था। श्वेता नर्सिंग होम में सुबह साढ़े छह बजे हेमा ने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन थोड़ी देर बाद उसकी हालत बिगडने लगी तो उसे रेफर कर दिया गया। मडिय़ाहूं पड़ाव स्थित एक अस्पताल ले जाने पर डाक्टर ने मृत घोषित कर दिया। सुरेश का आरोप है कि जिला अस्पताल में प्राइवेट अस्पतालों की मिली भगत से मरीजों का शोषण हो रहा है। उनकी जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।