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कोरोना के चलते टले ऑपरेशन, हालात सुधरने तक का इंतजार

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जौनपुर। कोरोना के फेर में उन मरीजों का उपचार अटक गया है, जिनका हाल ही में ऑपरेशन होना था। उन्हें महीने-दो महीने बाद कोरोना का संक्रमण कम होने पर आने को कहा जा रहा है। बढ़ते संक्रमण के खतरे के कारण चिकित्सक भी अपनी और मरीज दोनों की सेहत को ध्यान रखते हुए एहतियात बरत रहे हैं। इमरजेंसी केस में जिन मरीजों के ऑपरेशन हो भी रहे हैं तो इससे पहले कोविड-19 की जांच अनिवार्य की गई है। आलम यह है कि सामान्य दिनों की अपेक्षा 75 फीसदी ऑपरेशन कम हो गए हैं।
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कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के कारण सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं अप्रैल में ही ठप कर दी गई थीं। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही संचालित हो रही हैं। एहतियात के तौर पर निजी अस्पतालों ने भी ओपीडी में मरीजों का उपचार बंद कर टेलीफोन पर परामर्श देने की सुविधा शुरू की थी। मरीजों की भीड़ के बीच संक्रमण का खतरा अधिक था। लिहाजा चिकित्सक दूरी बनाते हुए सबको फोन पर ही परामर्श दे रहे हैं। सामान्य बीमारी में तो फोन से दवा-उपचार संभव हो जा रहा है, लेकिन उन मरीजों की परेशानी बढ़ गई है, जिन्हें ऑपरेशन कराना था। इसके लिए उन्हें पहले से तिथि भी मिली थी। पथरी, मोतियाबिंद, हाइड्रोसिल, हार्निया जैसे अन्य बीमारी से जुड़े अधिकांश मामलों के ऑपरेशन को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके शर्मा के मुताबिक ऑपरेशन के लिए जिसे भी पहले से तिथि दी गई थी, उन्हें अब कोरोना संक्रमण के बाद आने को कहा गया है। सिर्फ इमरजेंसी केस के ही ऑपरेशन हो रहे हैं। जिला महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके अग्रवाल ने बताया कि प्रसव से जुड़े मामले में ऑपरेशन करना जरूरी है। एहतियात के रूप में मरीजों की पहले कोविड जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट निगेटिव आने पर ही ऑपरेशन हो रहे हैं। इसी तरह पथरी के गंभीर मामले में भी हो रहा है। जिन मरीजों की स्थिति गंभीर नहीं है, उन्हें दवा देकर इंतजार के लिए कहा जा रहा है।
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नौ निजी अस्पतालों में भर्ती हैं कोरोना मरीज
जिले के नौ निजी अस्पतालों को प्रशासन ने कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिया है। इन अस्पतालों में कोरोना से जुड़े मरीजों का ही उपचार चल रहा है। इनमें भर्ती भी कोविड कंट्रोल रूम के माध्यम से हो रही है। इन नौ में से एक-दो को छोड़कर अन्य सभी में दूसरी बीमारियों के उपचार नहीं हो रहे हैं। मरीजों को फोन पर परामर्श दिए जा रहे हैं। जिन अस्पतालों का कोविड वार्ड हट कर है, वहां ही सिर्फ ऑपरेशन की प्रक्रिया चल रही है।
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कोविड जांच के बाद हो रहे इमरजेंसी ऑपरेशन
शहर के वरिष्ठ लेप्रोस्कोपिक व जनरल सर्जन डॉ. निलेश श्रीवास्तव ने बताया कि गंभीर श्रेणी के मरीजों को ज्यादा दिन टाला नहीं जा सकता। ऐसे मामलों में आरटी-पीसीआर जांच के बाद ऑपरेशन किया जा रहा है। ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह सैनिटाइज कर रहे हैं। पीपीई किट पहनकर और उपकरणों को भी लगातार सैनिटाइज किया जा रहा है, जिससे किसी भी तरह से संक्रमण का खतरा न रहे। जनरल सर्जन डॉ. आदित्य ने बताया कि सिर्फ वही ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जिसे अब टाला नहीं जा सकता। इमरजेंसी होने पर एंटीजन किट से जांच कराई जा रही है। जो मरीज ज्यादा दबाव दे रहे हैं, उनकी आरटी-पीसीआर जांच के बाद भी ऑपरेशन हो रहा है। इस दौरान पूरी सतर्कता बरती जा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र यादव ने बताया कि अप्रैल के पहले पखवाड़े तक ऑपरेशन हुए हैं, लेकिन उसके बाद कोरोना संक्रमण तेज होने और कर्फ्यू की व्यवस्था लागू होने से ऑपरेशन बंद कर दिए गए। मरीजों को इंतजार के लिए कहा जा रहा है।
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मोतियाबिंद, हाइड्रोसिल, पथरी के कुछ मामले सहित कई अन्य बीमारियों में जहां दवा से कुछ दिन तक मरीज को स्वस्थ रखा जा सकता है, वहां ऑपेरशन से बच रहे हैं। इमरजेंसी केस में भी पूरी सतर्कता के साथ ही ऑपरेशन हो रहे हैं। सामान्य दिनों की अपेक्षा यह आंकड़ा 25 फीसदी है। अन्य मरीजों को हालात सुधरने को कहा जा रहा है। -डॉ. एए जाफरी, वरिष्ठ सर्जन व सचिव आईएमए।
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