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नदियां रहेंगी, तभी लोग जिंदा रहेंगे : राजेंद्र सिंह

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जौनपुर। शाही पुल के 15 में से केवल 7 द्वार ही बचे हैं, ये गोमती नदी के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का संकेत हैं। नदियां जिंदा रहेंगी, तभी लोग जिंदा रहेंगे। नदी सिर्फ जल की धारा नहीं, वह हमारे गांव, हमारी संस्कृति और हमारे जीवन की आत्मा है। ये बातें तरुण भारत मंच के संस्थापक और भारत के जल पुरुष के रूप में विख्यात राजेंद्र सिंह ने शुक्रवार को जौनपुर में पत्रकार वार्ता कर कही। गोमती नदी की दुर्दशा पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक लोग नहीं जागेंगे, तब तक सरकारें नदियों की हत्या करती रहेंगी। उन्होंने कहा, नदियों का पुनर्जागरण नहीं हो रहा, बल्कि उनकी हत्या की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोमती नदी के ब्लू जोन में बना घाट, नदी के जीवन में हस्तक्षेप है और जिस इंजीनियर ने इसे डिजाइन किया, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। राजेंद्र सिंह ने बताया कि तरुण भारत मंच 1975 से जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। आज तक राजस्थान के अलवर जिले में 800 से अधिक छोटे-बड़े बांधों का निर्माण कराया गया है। इससे सूखी नदियों में फिर से जीवन लौटा। यह मॉडल महाराष्ट्र, गुजरात और अन्य राज्यों में भी सफलतापूर्वक लागू किया गया है। कार्यक्रम का समापन आ बदल तो आते हैं हर रोज़ हमारे गांव में, पर नदी नहीं आती, अब सूखा ही सूखा है जीवन में...लोकगीत से हुआ।
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