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कुरआन और अहलेबैत का दामन थामने वाला कभी गुमराह नहीं होता : मौलाना जैदी

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अलविदाई मजलिस में शामिल लोग। आयोजक - फोटो : reasi news
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संवाद न्यूज एजेंसी जौनपुर। मोहल्ला अजमेरी में सैयद अली शब्बर के मकान पर कर्बला के शहीदों की याद में अलविदाई मजलिस का आयोजन हुआ। इसमें शामिल अजादारों ने कर्बला के शहीदों का गम मनाया और अलम की जियारत की। मजलिस में सोजख्वानी आमिर मेहंदी कजगांवी ने और पेशख्वानी मेहंदी जैदी व कैफी मोहम्मदाबादी ने किया। मौलाना सैयद मोहम्मद ख्जान जैदी ने बताया कि मुहर्रम का चांद होने के बाद से शिया समुदाय दो महीना आठ दिन गम मनाते हैं। अब गम के तीन दिन ही बचे हैं। इसलिए दिल खोलकर शहीदाने कर्बला का गम मनाते हुए बीबी फातिमा को पुरसा दीजिए। मौलाना शाजान जैदी ने कहा कि अल्लाह ताला ने उम्मत के लिए दो सबसे बड़ी नेमतें दी हैं। एक कुरआन और दूसरे अहलेबैत। ये दोनों इंसान को सीधी राह दिखाने का सबसे बड़ा जरिया है। उन्होंने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने फरमाया था कि वे अपनी उम्मत के बीच दो भारी चीजें छोड़कर जा रहे हैं। कुरआन और अहलेबैत जो इन दोनों का दामन थामे रहेगा, वह कभी गुमराह नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कुरआन हिदायत की किताब है। जबकि अहलेबैत उसकी सही तफसीर और असली नमूना है। मौलाना ने जोर दिया कि जिस घर में कुरआन की तिलावत होती है। अहलेबैत की मोहब्बत बसती है। मौलाना शाजान जैदी ने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि अहलेबैत ने अपने चाहने वालों को कभी शर्मिंदा नहीं किया। उन्होंने शोहदा-ए-कर्बला की कुर्बानियों को याद किया। उन पर हुए मसाएब पढ़ा। जिसे सुनकर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गई। उसके बाद शबीहे अलम निकाला गया। अंजुमन गुलशने इस्लाम बाजार भुआ ने नौहा पढ़ा व मातम किया। कमर जौनपुरी का लिखा अलविदाई नौहा अंजुमन ने अपनी गमगीन आवाज में पढ़ा। हुसैन मुस्तफा वजीह ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर सै. मो मुस्तफा, मुफ्ती अनवार हैदर, कायम आब्दी, सै. इमदाद मेहंदी, मुफ्ती नजमुल हसन काजमी, हाजी ताहिर खान, मुफ्ती शारिब मेहंदी, जीशान काजमी उपस्थित रहे।
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