कलेक्ट्रेट स्थित क्रांति स्तंभ।
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भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जंग-ए-आजादी के दीवाने क्रांतिकारी छात्रों की टोलियों ने 12 अगस्त 1942 को कलेक्ट्रेट को घेर लिया था। वहां लगे यूनियन जैक को उतार लिया था। वहां तिरंगा फहराने जा रहे थे कि तत्कालीन अंग्रेज कप्तान इमग्रेन के आदेश पर छात्रों पर गोली चला दी गई थी, जिससे कई लोग घायल हो गए थे और उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार भी कर लिया।
नौ अगस्त 1942 को छात्र सेनानी वीर दिवाकर सिंह को अंग्रेजों भारत छोड़ो का प्रस्ताव पारित होने की जानकारी मिली थी। इस दौरान क्रांतिकारी छात्रों को पता चला था कि दिल्ली में महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू, अबुल कलाम आजाद व अन्य गिरफ्तार कर लिए गए हैं। कांग्रेस कमेटी कार्यालय पर भी पुलिस का छापा पड़ा है। इसमें राय अम्बिका सिंह, पं.अभयजीत दुबे, भगवती दीन तिवारी, दीपनारायण वर्मा, शिववर्ण शर्मा, रामगोविंद दुबे, रामशिरोमणि दुबे, द्वारिका प्रसाद मौर्य, रामेश्वर प्रसाद सिंह, गजराज सिंह समेत अन्य नेता गिरफ्तार कर लिए गए। कोई नेता संचालन के लिए नहीं रह गया है। इसके बाद 10 अगस्त को छात्रों की बैठक हुई थी। इसमें वीर दिवाकर सिंह को संचालन का कार्यभार दिया गया था।
बैठक के बाद छात्रों ने उसी दिन कारागार पर प्रदर्शन किया और तिरंगा झंडा लगा दिया। इस बीच पुलिस दल आ गया और लाठी चार्ज किया। जिसमें दिवाकर सिंह गिरफ्तार हुए। इसके बाद 11 अगस्त को छात्रों ने बैठक कर रणनीति बनाई फिर छात्र सेनानियों ने 12 अगस्त को कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इसमें काशी विद्यापीठ व काशी हिन्दू विश्व विद्यालय के कुछ छात्र भी शामिल रहे। यूनियन जैक हटाकर तिरंगा लगाने का प्रयास किया। जानकारी होते ही पुलिस पहुंची तो झंडे को लेकर छात्रों से छीना-झपटी करने लगी। इस दौरान हुए लाठीचार्ज में किसी ने पत्थर चलाया जो कप्तान एमग्रेन को लग गया, जिससे वह घायल हो गया। इसके बाद बौखलाए कप्तान ने गोली चलाने का आदेश दे दिया था। इसमें दिवाकर, केदारनाथ सिंह, सूबेदार मिश्र, मोहम्मद उमर, केदार नाथ सिंह समेत तमाम लोग घायल हुए। जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 25 दिसंबर 1944 को जेल से छूटने के बाद दिवाकर सिंह को जनपद से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद विकास भवन के सामने क्रांति स्तंभ का निर्माण कराया गया। यहां हर साल 12 अगस्त के दिन सामाजिक संगठन के लोग और अधिकारी तिरंगा फहराते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।