मां शीतला का दिव्य रूप। स्रोत-संवाद
नवरात्र के छठवें दिन मां दुर्गा के छठवें स्वरुप माँ कात्यायनी की पूजा हुई। चाैकिया धाम में लाल चुनरी, गुलाब और दौना के फूलों से मां शीतला का शृंगार किया गया। मंदिर के महंत विवेकानंद ने पान, मेवा और बर्फी से मां को भोग लगाया। भोर में आरती के बाद मंदिर के कपाट दर्शन के लिए खोल दिए गए।
शृंगार के बाद मां शीतला की आरती की गई। आरती के बाद श्रद्धालुओं की कतार लग गई। हाथ में नारियल, चुनरी लेकर माता शीतला के दर्शन किए। महिलाएं कतार में लगने के दौरान भी माता रानी के पचरा गाती रहीं। महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि नवरात्र के छठवें दिन मां दुर्गा छठवें स्वरुप में कात्यायनी माता की पूजा की जाती हैं। माता को साहस और सफलता की देवी माना जाता है।
इस दिन पीले या लाल वस्त्र पहनकर मां को पीले फूल, शहद और भोग अर्पित करने और ॐ देवी कात्यायन्यै नमः मंत्र का जाप करने से सुख-शांति व विवाह संबंधी समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
मां कात्यायनी को ऋषि कात्यायन की पुत्री माना जाता है। जिन्होंने गोधूलि बेला में पूजा स्वीकार की थी। दोपहर 3 बजे तक श्रद्धालुओं की लंबी कतार दर्शन के लिए लगी रही।
उधर, नगर के परमानतपुर स्थित मां शारदा मैहर वाली मंदिर में मां शारदा का विशेष शृंगार किया गया। माता को लाल चुनरी और आभूषणों से सजाया गया। आरती के दौरान जय माता दी के जयकारों से पूरा मंदिर गूंज उठा। नगर के सीटी स्टेशन स्टेशन रोड स्थित मां दक्षिणा काली मंदिर में दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भीड़ रही। पुजारी बागीश सिंह ने आरती कर प्रसाद वितरण किया।