जौनपुर। शहर की सड़कों पर छुट्टा पशुओं की आवाजाही बढ़ गई है। एक तो चिलचिलाती गर्मी में लोग जल्दी अपने घरों में पहुंचना चाहते हैं लेकिन सड़कों पर छुट्टा पशु रोड़ा बने रहते हैं। इससे हादसे की आशंका भी बनी रहती है। अब तो पालतू पशु भी सड़कों पर दिखने लगे हैं। इससे राहगीरों और व्यापारियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। इस समस्या के प्रति नगरपालिका प्रशासन की अनदेखी से व्यापारियों में नाराजगी है।
वैसे जनपद में कहने को तो 106 स्थानों पर ऐसे पशुओं को रखने के लिए गो आश्रय बनाए गए हैं। जहां पांच हजार 334 पशु हैं। इसमें बात अगर सिर्फ शहर की करें तो कृषि भवन परिसर में एक गो आश्रय बनाया गया है, जहां करीब 450 पशु हैं। हालांकि सीवीओ राजेश कुमार सिंह के मुताबिक इस गोशाला में और भी पशु रखे जा सकते हैं। ज्यादा होने पर यहां से पशुओं को दूसरे गोशालाओं को भी सुपुर्दगी में दे दिया जाता है। मगर हकीकत में स्थिति इसके उलट है। ग्रामीण इलाकों की बात ही छोडि़ए। नगर में भी लोग छुट्टा पशुओं को छोड़ दे रहे हैं। इन दिनों शायद ऐसा कोई मार्ग होगा, जहां आधे-एक घंटे में चार-छह पशु न दिखाई दी जाए। बड़ी बात तो यह कि इन पशुओं की टैगिंग भी हुई है लेकिन नगर पालिका प्रशासन इन पशुओं के धर-पकड़ के लिए कोई अभियान नहीं चलाता है। इससे ये पशु राहगीर चलते लोगों और सड़क किनारे दुकान लगाने वाले व्यापारियों के लिए सिरदर्द बन गए हैं। सप्ताह में एकाध बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि जब पशु आपस में ही भिड़ जाते हैं और वहां मौजूद लोगों को इन्हें लेकर चर्चा करने को मजबूर हो जाना पड़ता है, किंतु जिम्मेदार अपने आदत से बाज नहीं आते।
जिले में 15-20 हजार होंगे छुट्टा पशु
जौनपुर। पशु पालन विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2012 में पशु गणना में जिले में कुल पशुओं की संख्या 9.36 लाख 273 थी। अनुमान है कि अब पशुओं की संख्या 10 लाख से अधिक है। इसमें साढ़े चार लाख गोवंशी मवेशी हैं। वर्ष 2012 में छुट्टा मवेशियों की संख्या 11 हजार 438 थी, जो अब बढ़कर 15-20 हजार से अधिक होने का अनुमान हैं।
दूध न देने वाली गायों को छोड़ दे रहे लावारिस
जौनपुर। खास तौर से गौवंशी मवेशियों को खरीदने और बेचने का धंधा लगभग बंद हो चुका है। इस नाते बछड़े और दूध न देने वाली गायों को लोग लावारिस छोड़ दे रहे हैं। ऐसे लोग रात में मवेशियों को लेकर घर से निकलते हैं और कहीं दूर इलाके में छोड़ देते हैं। ऐसे लावारिस पशु जहां तहां झुंड बनाकर रहने लगते हैं। हालात यह है कि 1740 ग्राम पंचायतों वाले इस जिले में कोई भी ऐसी ग्राम पंचायत नहीं है जहां छुट्टा पशुओं से लोग परेशान न हों। कहीं-कहीं तो झुंड में छुट्टा पशु चलते हैं और ये लोगों पर हमला भी कर देते हैं।
शहर में घुमंतू पशुओं में अधिकांश पालतू पशु हैं। इसके लिए डेरी संचालकों को चेतावनी दी जा चुकी है। हालांकि पशुओं को पकड़ा भी जाता है, मगर अब इसके लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। - रजनीश राय, अपर जिलाधिकारी भू-एवं राजस्व (नोडल अधिकारी, नगर)