जौनपुर। पूर्वांचल विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में मंगलवार को प्रदेश में पर्यटन का विकास: चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। आयोजन सेंटर आफ एक्सीलेंस इन टूरिज्म मैनेजमेंट एंड रिसर्च पूर्वांचल विश्वविद्यालय की ओर से किया गया। सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के प्रो. निमित रंजन चौधरी ने कहा कि कोविड के दौरान पर्यटन को बहुत बड़ा धक्का लगा है। किसी भी क्षेत्र की कोई चीज मशहूर है तो उसकी जानकारी वहां के महत्वपूर्ण स्थलों पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन के अलग-अलग स्थलों का विभिन्न प्रकार से पैकेज तैयार करना चाहिए, ताकि पर्यटक को सुविधा हो। रोजगार के अवसर को देखते हुए पर्यटन पर भारत सरकार अच्छा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के अन्य तीर्थों को जौनपुर से जोड़कर रोजगार के अवसर सृजित किए जाए। कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं यहां पर पहाड़, नदियां, मंदिर सब कुछ है। जो सुविधाओं के साथ-साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा देता है। पूर्वांचल के विंध्याचल, बनारस, जौनपुर आदि पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जो स्थानीय लोगों की आजीविका का साधन भी है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के टूरिज्म विभाग के डॉ. अनिल सिंह ने कहा कि भारत बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करता है। देश में आगरा अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए पहली पसंद है। अयोध्या और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को विकसित किया गया है जिससे रोजगार के अवसर बढ़ें हैं। पर्यटन अधिकारी वाराणसी क्षेत्र कीर्तिमान श्रीवास्तव ने कहा कि कोविड-19 के कारण पर्यटन क्षेत्र ने बहुत सारी चुनौतियों का सामना किया है। स्वागत भाषण प्रो. मानस पांडेय ने और संचालन डॉ.आशुतोष कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो.देवराज सिंह, प्रो. राजेश शर्मा, डा. मनोज मिश्र, डा. गिरधर मिश्र, डा. रसिकेश, डा. पुनीत धवन डा. सुशील कुमार, डा. आलोक गुप्ता, डा. अमित वत्स, डा. जाह्नवी श्रीवास्तव, डा. धीरेन्द्र, डा.परमेन्द्र विक्रम सिंह, डा. चंद्रा अग्रवाल मौजूद रहे।