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चरण पादुका को सिर पर रखते देख छलक पड़े नयन

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आदर्श रामलीला धर्म मंडल उसरौली शहाबुद्दीनपुर के कलाकारों ने शनिवार की रात त्याग, बलिदान और श्रद्धा की प्रतिमूर्ति भरत के द्वारा राज पाट छोड़कर भाई श्रीराम को मनाने वन में जाने और चारों भाइयों के प्रेम की पराकाष्ठा का जीवंत मंचन किया। भरत चरण पादुका सिर पर रख अश्रुधारा बहाते हुए वापस अयोध्या लौट रहे हैं, तभी नेपथ्य से राम भक्त ले चला रे राम की निशानी, राम चरित मानस की चौपाई प्रभु कर कृपा पांवरी दीन्ही, सादर भरत शीश धरि लीन्ही की आवाज सुर, लय ताल गूंज उठी। सामयिक गीत को सुन दर्शकों की आंखें छलक पड़ी। लोग भरत की जय जयकार लगाने लगे। रामलीला का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि थानाध्यक्ष सरपतहा इंस्पेक्टर बिजेंद्र व खुटहन थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर संतोष शुक्ला ने संयुक्त रुप से फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि रमलीला सभी धर्मो का उद्गम स्थल है। यह हमें समभाव, त्याग, प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश देता है। रामायण ऐसा पवित्र धार्मिक ग्रंथ है, जो हमें सभी धर्मों का आदर करने की प्रेरणा देता है। रामलीला में सूर्पनखा का अभिनय कर रहे सांवले शर्मा, और हास्य कलाकार राधेश्याम उपाध्याय, अजय पांडेय को खूब सराहा गया। इस मौके पर संजय ओझा, बद्री प्रसाद पांडेय, आदेश मिश्रा, मुन्ना पांडेय, हमेश पांडेय, आदि मौजूद रहे। संचालन कमलेश पांडेय ने किया।
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