जलालपुर। क्षेत्र के कुटीर पीजी कॉलेज चक्के सभागार में शुक्रवार को स्वर्ण जयंती श्रृंखला, उच्च शिक्षा संस्थाओं में नैक मूल्यांकन की अनिवार्यता एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। वक्ताओं ने नैक से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही। मुख्य अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य ने कहा कि नौकरी ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है। उसके लिए अच्छा परिवेश होना चाहिए। महाविद्यालय में जहां पर व्यवस्थाएं हैं उनके लिए नैक मूल्यांकन करवाने में झिझक नहीं होनी चाहिए। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को बढावा देने की जरूरत पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फार्मास्यूटिकल्स एंड एजुकेशनल रिसर्च हैदराबाद के कुलसचिव प्रो. जेपीएन मिश्र ने कहा कि कुटीर संस्थान एवं बीएचयू की मान्यता में समानता लग रही है। जैसे मालवीय जी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की उसी नीति पर संस्थापक ने कुटीर संस्थान का निर्माण करवाया है। अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषध बेंगलुरु के पूर्व निदेशक प्रो. एएन राय ने कहा कि महाविद्यालय के नैक मूल्यांकन होने से उसमें निखार आता है। पूविवि के आइक्यूएसी के समन्वयक प्रो. मानस पांडेय कहा कि नैक व राष्ट्रीय शिक्षा नीति से शिक्षा में सुधार आएगा। पूविवि रज्जू भैया संस्थान के निदेशक प्रो. देवराज सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यशाला से जागरुकता आती है। प्रबंधक डॉ. अजयेंद्र कुमार दुबे ने महाविद्यालय में खाली पड़े शिक्षकों के पद को भरने की बात कही। नैक प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. राघवेंद्र कुमार पांडेय ने नैक मूल्यांकन पर प्रकाश डाला। संचालन पूनम सिंह ने किया। इस दौरान प्राचार्य मेजर डॉ. रमेश मणि त्रिपाठी, विजयेन्द्र कुमार दुबे, विद्यानिवास मिश्र आदि मौजूद रहे।