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मुहर्रम : ग्रामीण क्षेत्रों में भी गूंजीं 'या हुसैन' की सदाएं

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मछलीशहर में गमी जुलूस की शक्ल में ताजिये को लेकर दफन करने जाते जायरीन। नागरिक
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जौनपुर: मुहर्रम की दसवीं तारीख शुक्रवार को गमगीन माहौल में ताजिया जुलूस निकाले गए। इस दौरान 'या हुसैन' के नारों से क्षेत्र गूंज उठे और कई स्थानों पर गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिली।
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सिंगरामऊ: मेढ़ा, बहरीपुर, मल्लूपुर, लबिदाही व कुधूआ समेत विभिन्न गांवों में मुहर्रम पर या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। खेतासराय: मुहर्रम की दसवीं तारीख यौमे आशूरा पर को नगर में परंपरागत ताजिया जुलूस निकाला गया। नगर सहित आसपास के 18 ताजिया चौकों से निकले ताजिये तीन अलग-अलग समूहों में नगर भ्रमण करते हुए मुख्य चौक फातमान गेट पहुंचे। यहां ताजियादारों ने फातिहा पढ़ी। इसके बाद सभी ताजिये तकिया स्थित इमामबाड़े होते हुए करबला पहुंचे, जहां देर शाम ताजिये सुपुर्द-ए-खाक किए गए।
मछलीशहर: सैयदवाडा, खानजादा, सैयदगंज, पूरादोषी, कजियाना और चौहट्टा से ताजिया, अलम और तबल के साथ हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में जुलूस निकाला गया। जुलूस जंघई तिराहे होते हुए करबला पहुंचा,जहां ताजियों को दफन किया गया। जुलूस में अलम और दुलदुल घोड़ा भी शामिल रहे। रामपुर: नगर पंचायत रामपुर में धनुहां, रामपुर, अंसारी मोहल्ला सहित अन्य कमेटियों द्वारा शुक्रवार को दोपहर में मुहर्रम का जुलूस निकाला गया
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मुंगराबादशाहपुर: मछलीशहर रोड मामा टंकी से मुहर्रम का जुलूस निकला। इमामबाड़े पर लोगों ने झंडा फहराया। डंका, अलम, नगाड़ा, ताजिया, दुलदुल व घोड़े के साथ ही सबीहे का जुलूस कर्बला पहुंचा। कर्बला में सैकड़ो ताजिए और उनके फूल एहतराम के साथ दफ़नाए गए। सीओ प्रतिमा वर्मा व थाना प्रभारी अश्विनी दूबे मयफोर्स के साथ शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जुलूस में शामिल रहे। सुरेरी: भानपुर, सरायडीह, कमरुद्दीनपुर, अड़ियार, हरिहरपुर, कसेरू सहित विभिन्न गांवों से गमगीन माहौल में ताजियों का जुलूस निकाला गया।
चंदवक : चंदवक, बरमलपुर, हरिहरपुर, थुनही, भैसा, घुड़दौड़, बीरीबारी, खुंझी, बकटही समेत क्षेत्र के कई गांवों से निकले ताजिया जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। थाना परिसर में पहुंचने पर पारंपरिक कलाकारों ने लाठी, तलवार और अन्य पारंपरिक युद्धक कलाओं के रोमांचक करतब प्रस्तुत किए। संवाद
नम आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किए ताजिये-शाहगंज। नई आबादी से निकला ताजिया जुलूस नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए शाहपंजा स्थित कर्बला पहुंचा, जहां धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जुलूस में ताजिया, अलम और जुलजनाह शामिल रहे। अजादार काले लिबास पहनकर और नंगे पैर ''या हुसैन'' की सदाओं के साथ नौहा पढ़ते व मातम करते हुए चल रहे थे। पूरे मार्ग पर शोक और अकीदत का माहौल बना रहा। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। संवाद

मछलीशहर में गमी जुलूस की शक्ल में ताजिये को लेकर दफन करने जाते जायरीन। नागरिक

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