मां शीतला का भव्य रूप। स्रोत-संवाद
धर्मापुर। मां शीतला चौकियां धाम में शुक्रवार को वासंतिक नवरात्र के नवें दिन भक्तों ने मातारानी के सिद्धिदात्री स्वरूप का दर्शन पूजन किया। भोर में मां शीतला का लाल, पीली और हरी चुनरी से शृंगार किया गया। मां को मेवा, फल और पेड़े का भोग लगाया गया।
भोर में ही मां के दरबार में श्रद्धालुओं की कतार लग गई। शीतला माता के जयघोष के साथ भक्तों ने दर्शन पूजन किया। नवरात्र की नवमी होने के कारण दोपहर तीन बजे तक धाम में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महंत विवेकानंद पंडा ने बताया कि चैत्र नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह देवी दुर्गा का अंतिम और सर्वोच्च स्वरूप है। यह दिन महानवमी कहलाता है। इसमें माता सिद्धिदात्री को कमल पर विराजमान स्वरूप में पूजा जाता है जो सिद्धियां और ज्ञान प्रदान करती हैं। इस दिन कन्या पूजन, हवन और दुर्गा सप्तशती का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे भक्तों को मोक्ष और पूर्णता की प्राप्ति होती है। मां सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों की देवी है। इस दिन कन्या पूजन 9 कन्याओं और माता के 9 वें स्वरूप के मंत्रों का 108 बार जाप करना उत्तम माना जाता है। नवरात्र के 9 दिनों की पूजा का समापन हवन और दुर्गा चालीसा, सप्तशती के पाठ से करना चाहिए। मंदिर के बगल में स्थित सत्य नारायण ठाकुर मंदिर में दिन के 12 बजे रामजन्म उत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूर्वांचल के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं ने मुंडन संस्कार, पूजन आदि करके परिवार समेत मां के चरणों में मत्था टेककर सुख, शांति, समृद्धि, धन, यश, वैभव की कामना की।
व्रती महिलाओं ने अपने घर में विधि-विधान से दुर्गा सप्तशती पाठ करके आरती हवन पूजन कर वासंतिक नवरात्र का समापन किया। शीतला चौकियां धाम मंदिर में नवरात्र के नवमी के दिन महंत विवेकानंद पंडा ने पुजारियों के साथ नौ कन्याओं का पीतल की थाल में पैर घुल कर माथे पर रोली लगाया। सभी कन्याओं के सिर पर लाल चुनरी रखकर हलवा व पूरी खिलाया। नौ कन्या का आशीर्वाद भी लिया। इस मौके पर मंदिर के उप प्रबंधक सौरव पंडा, मंदिर अध्यक्ष विकास पंडा, लड्डू पंडा, रंजीत पंडा, विजय पंडा आदि मौजूद रहे।