रामनगर। महाकुंभ स्नान करने गए नेवढि़यां थाना क्षेत्र के उसराव पुरवा गांव निवासी सास-बहू की प्रयागराज हादसे मेंं दर्दनाक मौत हो गई, जबकि ससुर घायल हो गए। सूचना मिलने पर घरवाले शव लेने के लिए प्रयागराज रवाना हो गए। देर रात तक शव घर नहीं पहुंचा था।
नेवढि़या थाना क्षेत्र के उसराव पुरवा गांव से मंगलवार की दोपहर एक पिकअप पर 23 लोग सवार होकर प्रयागराज महाकुंभ स्नान करने गए थे। रात करीब डेढ़ बजे स्नान के लिए लोग पैदल ही जा रहे थे इसी दौरान हादसा हो गया। इसमें गांव के रामपत्ती देवी (70) पत्नी धर्मराज राजभर व बहू रीता (37) पत्नी पंकज की मौत हो गई जबकि धर्मराज का पैर टूट गया। सुबह पांच बजे पड़ोसी क्रांति को फोन से हादसे की सूचना मिली। इसके बाद गांव के लोग प्रयागराज के लिए रवाना हुए। भीड़ के चलते देरशाम चार बजे लोग प्रयागराज पहुंचे। बिछड़े हुए लोगों को इकट्ठा किए। वहां की पुलिस शव का पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं रही, कहा गया कि जिले से पीएम होगा। देर रात तक मृतकों के शव घर नहीं पहुंचे थे। मौत की सूचना के बाद गांव में मातम छा गया, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।।
परिवार के यह भी सदस्य गए थे साथ में :-घटना में उसराव पुरवा के मृतकों के परिवार में मृत रीता की तीन बेटियां अन्नू 12, कोमल 10, अंजलि 8 भी साथ में गईं थी। वहीं रीता के जेठानी बिंदु देवी की बेटी पायल भी गई थी।
मां ने हमें आंचल में समेट लिया, ऊपर से कुचलते रहे लोग
रामनगर। नेवढि़यां थाना क्षेत्र के उसराव पुरवा निवासी रीता देवी व उसकी सास रामपत्ती देवी की दर्दनाक मौत से पूरा परिवार दुखी है। इस दौरान हुए हादसे की आंखों देखी रीता देवी की बेटी कोमल ने बताया। उसने बताया कि मां ने हम तीनों बेटियों को अपनी आंचल में समेट लिया और ऊपर से लोग कुचलते रहे। कहा कि जब उसने पास में खड़े पुलिस वाले से बचाने की गुहार लगाई तो उन्होंने कहा कि वह कितने लोगों को बचाएंगे। कोमल ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मां व दादी की मौत का जिम्मेदार बताया। कोमल ने बताया कि रात करीब दो बजे परिवार व गांव के लोग शाही स्नान करने जा रहे थे। वे एक गेट के पास पहुंचे थी इसी दौरान हादसा हो गया। जमीन पर गिरे बूढ़े, बच्चे व जवान लोगों के पैर के नीचे दबने लगे। हर तरफ चीख-पुकार मचने लगी। इस दौरान मां रीता ने उसको, उसकी बहन अन्नू व अंजलि को बचाने के लिए अपने नीचे लपेट लिया और लोग ऊपर से कुचलते जा रहे थे। मां चीखती-चिल्लाती रही लेकिन किसी को उनकी आवाज नहीं सुनाई दी। कोमल ने बताया कि इस दौरान उसने वहां खड़े एक पुलिस वाले से कहा कि अंकल बचा लीजिए तो उसने कहा कि हम कितने लोगों को बचाएंगे। करीब तीन घंटे बाद भारी संख्या में फोर्स पहुंची। बहुत से लोग बेहोश पड़े थे, इस दौरान दादा धर्मराज राजभर तो मिले लेकिन मां, दादी बिछड़ गई थी। शाम चार बजे अस्पतालों का चक्कर लगाने के बाद यह पता चला कि उसकी मां व दादी की मौत हो गई। प्रशासन की लापरवाही से हमारे सिर से मां का सहारा छिन गया। हमको न्याय व नौकरी चाहिए।