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निजी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच रहे अधिक मरीज

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जौनपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज में सुस्ती बहुत है। मरीज सरकारी अस्पतालों में जाना नहीं चाहते हैं क्योंकि जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य किसी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की बुनियादी सुविधा ही नहीं हैं। कैंसर, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की तो सुविधा ही नहीं है। गंभीर रोगियों को बाहर जाना पड़ता है।
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आयुष्मान भारत योजना के एक साल बीतने के बाद भी महज 1981 मरीजों का इलाज किया जा सका है। इसमें से 1061 मरीजों का इलाज जिले के अस्पतालों में इलाज हुआ है जबकि 920 मरीजों ने दूसरे जनपद के अस्पतालों में इलाज कराया है। आयुष्मान योजना के तहत जिसे में कुल 17 अस्पतालों को इमपैनल्ड किया गया है। आयुष्मान योजना के तहत जिन अस्पतालों को चयन किया गया है, उसमें पांच निजी और 12 सरकारी अस्पताल हैं। योजना के तहत जिले में हुए कुल इलाज में सर्वाधिक 880 जिले के चार निजी अस्पतालों में किए गए। इसमें से सिद्धार्थ अस्पताल में 139, ईशा अस्पताल में 494, कुंवर दास सेवा आश्रम में 164 और आशीर्वाद हास्पिटल में 83 मरीजों ने इलाज कराया है। कृष्णा हार्ट केयर सेंटर में एक भी मरीज इलाज कराने नहीं पहुंचा। जिला पुरुष अस्पताल में 63, जिला महिला अस्पताल में 18, सीएचसी बदलापुर में 42, केराकत में 21, डोभी में 31, मुफ्तीगंज में तीन और बरसठी में तीन मरीजों ने इलाज कराया है। शेष पांच सीेएचसी जलालपुर, मडियाहूं, महराजगंज, बक्शा, और मछलीशहर में एक भी मरीज इलाज के लिए नहीं गए। दरअसल जिला अस्पताल को छोड़कर किसी अन्य प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की बेहतर सुविधा ही नहीं है। ऐसे में मरीज कहीं जाना ही नहीं चाहते हैं।
सुविधा की कमी के कारण पांच सीएचसी पर नहीं गए मरीज
जौनपुर। सरकारी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना से कोरम पूरा करने के लिए भले ही जोड़ दिया गया है लेकिन हकीकत यही है कि इन अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं। जलालपुर, मडियाहूं, महराजगंज, बक्शा, और मछलीशहर सीएचसी में एक भी मरीज इलाज के लिए नहीं आए हैं।
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