उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पंकज मित्तल ने कहा कि भौतिकता की आंधी में नैतिक मूल्यों का ह्रास हो रहा है। सुखद स्थिति यह है कि नैतिक शिक्षा के द्वारा निर्मित व्यक्तित्व एवं चरित्र आज भी इस आंधी को रोकने में समर्थ है। उन्होंने कहा पैसा कमाना या उच्च पद पाना सफ लता का मापदंड नहीं है।
नैतिकता की शुरूआत पहले मां-बाप से फि र शैक्षणिक संस्थानों और अंत में समाज से होती है। वह शनिवार को पूविवि के फ ार्मेसी संस्थान में आयोजित नैतिकता, सफ लता एवं उत्कृष्टता एक जीवन पद्धति विषयक संगोष्ठी में विचार व्यक्त कर रहे थे।उन्होंने कहा कि मजबूत समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए नैतिकता जरूरी है।
भारत का संविधान हमें मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य प्रदान करता है, परंतु अफ सोस है कि हम अपने कर्तव्य को भूल गए हैं। केवल अधिकारों की मांग करते हैं। विशिष्ट अतिथि बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, पटना के पूर्व कुलपति प्रो. जनक पांडेय ने कहा कि व्यक्ति को अपने ज्ञानचक्षु को विकसित करने की जरूरत है।
शिक्षकों का कर्तव्य है कि वह ज्ञान देने से पूर्व अपना ज्ञान विकसित करें। समय परिवर्तनशील है और परिवर्तन के दौर उत्कृष्टता को बरकरार कर समय के साथ तालमेल बनाना जरूरी है। प्रबंध अध्ययन संस्थान बीएचयू के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. आरके पांडेय ने कहा कि व्यक्तित्व का निर्माण होने से ही देश का निर्माण होगा।
नैतिकता का संबंध बुद्धि व विवेक से है। अध्यक्षता कर रहे कु लपति प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल ने कहा कि जीयो और जीने दो के सिद्धांत को सार्थक करना जरूरी है। आज व्यक्ति सूचना और प्रौद्योगिकी पर सवार होकर नए-नए विकास कर रहा हैं। आज का युवा सारे सवाल के लिए नई सूचना तकनीकी पर आश्रित हो गया है।
ज्ञान के प्राचीन स्रोत से नई पीढ़ी दूर हो रही है। स्वागत प्रो. डीडी दूबे ने किया। कुलपति ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किया। आभार डा. अविनाश पाथर्डीकर ने जताया। इस अवसर पर एमके सिंह, कुलसचिव डा. देवराज, डा. संजीव सिंह, डा. टीबी सिंह, डा. एचसी पुरोहित, डा. अजय द्विवेदी, डा. मनोज मिश्र, डा. दिग्विजय सिंह, डा. एसपी तिवारी आदि रहे।