जौनपुर। मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन अभी भी शहर में सभी नालों की सफाई नहीं हो पाया है। नालों में सिल्ट और कचरा भरा हुआ है। जिससे बारिश होने से शहर के कई मोहल्लों में जल भराव हो जाता है। नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि अभी तक 14 बड़े नालों सहित कुल 18 नालों की सफाई अभी भी नहीं हो पाई है। जाम नाले गंदगी से बजबजा रहे हैं।
शहर के कुल 39 वार्डों में सवा तीन लाख की आबादी रहती है। घरों से निकलने वाले गंदे और बरसाती पानी के निकासी के लिए शहर में छोटे-बड़े कुल 50 नाले हैं। गोमती नदी के एक तरफ 31 और दूसरी ओर 19 नाले हैं। जिसमें 14 बड़े नाले हैं। इन बड़े नालों में मुफ्ती मोहल्ला ड्रेन, भलुआना टोला ड्रेन, किला ड्रेन, बलुआघाट ड्रेन, रासमंडल ड्रेन, अचला देवी घाट ड्रेन, कटघरा ड्रेन, जोगियापुर ड्रेन, मियांपुर ड्रेन, हरिपुर ड्रेन, शेखपुर ड्रेन व अहियापुर ड्रेन है। शेष 36 छोटे नाले हैं, जो वार्डों में स्थित हैं। जिनसे गंदा पानी निकल कर बड़े नालों से होते हुए गोमती नदी में गिरता है। इसमें सभी बड़े नालों सहित 18 नालों की सफाई अभी तक नहीं हो पाई है। नाले सिल्ट व कचरे से भरे पड़े हैं। इन नालों से सामान्य दिनों में गंदा पानी निकलने में दिक्कत हो रहा है। बारिश के बाद स्थिति भयावह होगी। शहर के निचले मोहल्ले ओलंदगंज, कालीकुत्ती, हनुमान, मियांपुर, रासमंडल, मुफ्ती मोहल्ला सहित कई मोहल्लों में बरसात के पानी से जलभराव होगा। जिससे लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ेगा।
बस साल में एक बार होती है नालों की सफाई
जौनपुर। सवा तीन लाख की आबादी वाले शहर में नालों की सफाई नगर पालिका की ओर से साल भर में मात्र एक बार कराई जाती है, वह भी नालों की सफाई बारिश का मौसम आने से पहले कराने का नियम है। इसके लिए नगर पालिका को अलग से बजट नहीं मिलता है। उसको अपने संसाधनों से नालों की सफाई करना पड़ता है। लेकिन हर साल पालिका प्रशासन आधे अधूरे नालों की सफाई कराकर अपनी जिम्मेदारी इतिश्री समझ लेता है। जिसके कारण बरसात का पानी नालों नहीं निकल पाता है। जिससे मोहल्लों में जल भराव होने से लोगों को घरों से निकलने और आवागमन में दिक्कत होगी।
नगर पालिका सभी नालों की सफाई नहीं कराता है। इक्का दुक्का नालों की सफाई कराकर अपना काम समाप्त समझ लेता है। जिससे नाला कूड़ा व कचरा से जाम पड़ा रहता है। किसी तरह धीमी गति से घरों को गंदा पानी निकल जाता है। नालों की शीघ्र सफाई कराने की मांग की है।- मुफ्ती मेंहदी, मुफ्ती मोहल्ला।
शहर का सबसे निचला इलाका काली कुत्ती है। हल्की सी बारिश होने पर जलभराव हो जाता है। ऐसे में नालों की सफाई नहीं होने से बारिश के समय तो और दिक्कत हो जाती है। बारिश होने से रोज जलभराव होता है। जिससे लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है। - राजेश कुमार सिंह, कालीकुत्ती।
नाला जाम रहने से जलभराव होने पर संक्रामक बीमारियां फैलने की संभावना बनी रहती है। कई बार नालों की विधित सफाई कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन हर साल नगर पालिका नालों के सफाई का कोरम पूरा करता है। बरसात होने पर जलभराव होने से दिक्कत होती है। - सलीम खान, तारापुर।
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नगर पालिका साल भर में एक बार नालों की सफाई कराता है। वो भी आधी अधूरी नालों की सफाई कर बैठ जाता है। नालों के सिल्ट जाम होने से बरसाती पानी की निकासी नहीं हो पाती है। जलभराव होने से बरसाती पानी के साथ गंदा पानी घरों तक फैल जाता है। लगभग ऐसा हर साल होता है।- कमलेश गुप्ता, रासमंडल
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नालों की सफाई कराई जा रही है। अभी भी 18 नालों की सफाई नहीं हो पाई है। इसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा। साल भर में बारिश के मौसम से पहले सफाई कराने का कार्य किया जाता है। यह कार्य नगर पालिका को अपने संसाधनों से कराना पड़ता है। -आरके प्रसाद, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका जौनपुर।