जौनपुर। रमजान के तीस रोजों के बाद खुशियां लेकर आई ईद को मुस्लिम बंधुओं ने पूरे अकीदत और पाकीजगी से मनाया। लॉक डाउन की बंदिशों के कारण ईदगाहों में जाने की बजाए लोगों ने घर में ही ईद की नमाज पढ़ी। मुल्क की तरक्की, अमनचैन और बीमारी से सलामती की दुआएं मांगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक-दूसरे को ईद की बधाइयां दी। सेवइयों का लुत्फ उठाया।
कोरोना के कारण पहली बार शहर के शाही ईदगाह, सदर इमामबाड़ा, ईदगाह बेगमगंज सहित जिले के अन्य ईदगाहों व मस्जिदों में सार्वजनिक नमाज नहीं हुई। शिया जामा मस्जिद नवाब बाग के इमामे जुमा मौलाना महफूजुल हसन ने हमाम दरवाजा स्थित नाइसिरिया मदरसा के लाइब्रेरी में नमाज अदा की और फेसबुक लाइव किया। उन्होंने कोरोना वायरस के खात्मे के लिए दुआ की। आह्वान किया कि इस संकट की घड़ी में ज्यादा से ज्यादा इबादत करें।हुसैनी फोरम इंडिया के अध्यक्ष हाजी सै मो. हसन, शिया जामा मस्जिद के मुतवल्ली शेख अली मंजर डेजी, डॉ. शकील अहमद, हुसैनी फोरम संयोजक खान इक़बाल मघु, तालिब रजा शकील एडवोकेट, परवेज हसन, एएम सनबीन स्कूल प्रबंधक तहसीन अब्बास सोनी, मिर्जा जावेद सुल्तान, मोहम्मद मुस्तफा, शाहिद मेंहदी, शाहिद रिजवी गुड्डू, शिया जामा मस्जिद के प्रवक्ता सैयद असलम नकवी, नासिर रजा गुड्डू, मो. मुस्लिम हीरा आदि मौजूद रहे।
सुन्नी समुदाय के अधिकांश लोगों ने घरों में ही नमाज अदा नहीं की। कुछ जगहों पर शुकराने की नमाज पढ़ी गई। केराकत क्षेत्र के सभी ईदगाह व मस्जिदों में ईद की नमाज नहीं पढ़ी गई। तमाम लोगों ने अपने घरों में नफिल की नमाज अदा कर मुल्क में अमन और कोरोना से निजात की दुआ की। मौलाना रईसुल खैरी, केराकत नगर के बड़ी ईदगाह के पेश इमाम मौलवी निजामुद्दीन व नरहन इस्माइल शाह बाबा स्थित ईदगाह के संरक्षक डा. बहादुर अली खान ने कहा कि पहली बार ईद की नमाज नहीं हुई है, लेकिन कोरोना को हराने के लिए ऐसा करना जरुरी था। मड़ियाहूं के नगत में ईद की नमाज घरों में अदा की गई।शमीम हाशमी एडवोकेट, नगर पंचायत अध्यक्ष रूखसाना व उनके पति समाजसेवी कमाल फ़ारूक़ी ने लोगों को ईद की मुबारकबाद दी। मछलीशहर, बदलापुर, शाहगंज, मुफ्तीगंज, गौराबादशाहपुर, धर्मापुर, जलालपुर, डोभी, सिकरारा, रामपुर, सुइथाकला, खुटहन, बरसठी, रामनगर आदि इलाकों में भी ईद का त्योहार घरों में मनाया गया।
शाही ईदगाह में चार लोगों ने पढ़ी नमाज
खेतासराय। शाही ईदगाह में सिर्फ चार लोगों ने ईदगाह में नमाज अदा की। अन्य लोगों ने अपने-अपने घरों पर शुकराने की नफिल नमाज पढ़ी। यही हाल नगर की हलीमी मस्जिद समेत अन्य ईदगाहों और मस्जिदों का रहा। नमाज के बाद लोग न तो परंपरागत रूप से गले मिले और न ही हाथ मिलाया। शाही ईदगाह पर इमाम कारी जलालुदीन ने नमाज पढाया। साथ ही सबकी सलामती और वबाई बीमारी से हिफाजत के लिए दुआ मांगी। मुंगराबादशाहपुर और ग्रामीण इलाकों में ईदगाह, अकबरी मस्जिद, जामा मस्जिद में ईद की नमाज पांच-पांच लोगों ने पढ़ी। इसके अलावा घरों मे नमाज पढ़ी गई। ईद की कोई हलचल नहीं दिखी। पुराने कपड़ों से ही लोगों ने ईद मनाई।