आरोपी ने वादी की गाड़ी तोड़फोड़ करके क्षतिग्रस्त कर दिया। दूसरी गाड़ी पर भी आरोपियों ने अंधाधुंध फायरिंग किया। पहली गाड़ी को जला कर लगभग 15-16 लाख रुपये का नुकसान कर दिया। अन्य वाहन भी क्षतिग्रस्त कर दिया। वहां पर उपस्थित क्षेत्र पंचायत सदस्यों को भी जान से मारने की नियत से गाड़ियों से खींचने लगे, जिससे वे लोग मतदान स्थल पर न पहुंच सके। मामले में पुलिस ने विवेचना करके कोर्ट में केस डायरी दाखिल की।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट ने चार फरवरी 1995 को हुए जीआरपी के सिपाही हत्याकांड में अंतिम बहस शुरू हो गई है। बुधवार को सीबीसीआईडी के सरकारी वकील मृत्युंजय सिंह, जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल सिंह व सरकारी वकील लाल बहादुर पाल ने बहस प्रारंभ किया। कोर्ट ने अगली तिथि 13 जून नियत की है।
पिछली तिथि पर पूर्व सांसद उमाकांत यादव ने साक्ष्य प्रस्तुत करने का प्रार्थना पत्र दिया था, जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व में ही त्वरित निस्तारण का निर्देश दिया है। मुकदमे की मानिटरिंग सीबीसीआईडी द्वारा की जा रही है।
जीआरपी सिपाही रघुनाथ सिंह ने एक प्राथमिकी दर्ज कराया था। जिसके मुताबिक 4 फरवरी 1995 को 2 बजे दिन में राइफल, पिस्टल, रिवाल्वर से अंधाधुंध फायरिंग करते हुए आरोपी आए और पुलिस लॉकअप में बंद चालक राजकुमार यादव को जबरन छुड़ा ले गए। गोलीकांड में सिपाही अजय सिंह, लल्लन सिंह और एक अन्य व्यक्ति की मौत हो गई थी।
उस समय चारों तरफ भय और आतंक का माहौल व्याप्त हो गया था और मौके पर अफरा-तफरी मच गई थी। पूर्व सांसद उमाकांत यादव, राजकुमार यादव, धर्मराज यादव, महेंद्र, सूबेदार, बच्चू लाल समेत सात लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने कोर्ट में केस डायरी दाखिल किया। पूर्व में पत्रावली एमपी एमएलए कोर्ट प्रयागराज चली गई। पुन: हाईकोर्ट के निर्देश पर पत्रावली दीवानी न्यायालय जौनपुर में स्थानांतरित हुई और यहां के एमपी एमएलए कोर्ट में अंतिम बहस शुरू हुई ।