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UP Election Result: राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव ने तोड़ा 42 साल का रिकार्ड, लगातार दूसरी बार जीती भाजपा

Sat, 12 Mar 2022 10:05 AM IST
वाराणसी ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर

सार

जौनपुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीते भाजपा के सिटिंग विधायक और प्रदेश के राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव ने 42 साल का रिकार्ड तोड़ा है। जी हां, इस सीट के मतदाता ने 1980 के बाद से किसी भी नेता और दल को लगातार दो बार मौका नहीं दिया था।
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राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव। - फोटो : अमर उजाला
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जौनपुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव जीते भाजपा के सिटिंग विधायक और प्रदेश के राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव ने 42 साल का रिकार्ड तोड़ा है। जी हां, इस सीट के मतदाता ने 1980 के बाद से किसी भी नेता और दल को लगातार दो बार मौका नहीं दिया था।

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चुनावी इतिहास पर नजर करें तो साल 1957 और 1962 में यादवेंद्र दत्त दुबे जनसंघ और 1977 और 1980 में कांग्रेस के कमला प्रसाद सिंह लगातार दो बार निर्वाचित हुए थे। इसके बाद कोई दल और नेता लगातार दो बार इस सीट से चुनाव नहीं जीता था। हालांकि इस रिकार्ड की बराबरी करने के लिए भाजपा ने गिरीश चंद्र यादव को चुनावी रण में उतारा था।

उन्होंने साल 2017 के चुनाव में 90324 मत पाकर जीत दर्ज की थी। 2017 में गिरीशचंद्र यादव ने सपा समर्थित कांग्रेस के सीटिंग विधायक नदीम जावेद को हराया था, जो 78040 मत पाकर दूसरे स्थान पर थे। इस चुनाव में जीतने के बाद गिरीशचंद्र यादव को राज्यमंत्री बनाया गया था। विधायक बनने के पहले पेशे से अधिवक्ता रहे गिरीशचंद्र यादव इस बार के चुनाव में कई राउंड तक की गणना में पीछे चल रहे थे।
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लेकिन, आखिरी के कुछ राउंड में बढ़त बनाए और लगातार दूसरी बार जीतने वालों की लिस्ट में अपना और भाजपा का नाम दर्ज करवा लिया। इस बार के चुनाव में उन्हें 97264 मत मिले, जबकि सपा के प्रत्याशी मो. अरशद खान को 88636 मत मिले। राजनीति के जानकारों का मानना है कि अरशद खान ने स्वजातीय और यादव मतदाताओं का वोट अच्छी-खासी पाकर राज्यमंत्री को कड़ी टक्कर दी थी। एक बार तो ऐसा लगा कि राज्यमंत्री चुनाव हार जाएंगे, लेकिन आखिर में वह 8628 मत पाकर चुनाव जीत गए।

अमित शाह की हुंकार नहीं आई काम

जौनपुर में अमित शाह की जनसभा - फोटो : अमर उजाला
मल्हनी विधानसभा सीट पर सपा और जेडीयू के प्रत्याशी के अलावा कोई प्रत्याशी अपनी जमानत तक नहीं बचा सका। इसमें भाजपा के प्रत्याशी और पूर्व सांसद केपी सिंह भी शामिल हैं, जिनके पक्ष में खुद गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रैली भी की थी। साथ ही माहौल बनाने के लिए यहां तक वायदा कर गए थे कि आप मल्हनी से डा. केपी सिंह को जिताओ, मैं प्रदेश का बड़ा नेता बनाकर भेजूंगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

जफराबाद क्षेत्र के ग्राम महरूपुर के मूल निवासी डा. केपी सिंह तब चर्चा में आए थे। जब उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपना जौनपुर सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंका दिया था। इसके बाद, उन्होंने जीत दर्ज की थी। 2019 में भी भाजपा ने उन पर दांव लगाया। हालांकि इस बार वह चुनाव हार गए थे।

मगर मल्हनी विधानसभा क्षेत्र के काफी अच्छा वोट हासिल किए थे। इसके आधार पर इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट दिया था। वहीं, गृहमंत्री अमित शाह ने भी डा. केपी सिंह के पक्ष में इस बार के विधानसभा चुनाव की आखिरी सभा की थी। 
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इसमें उन्होंने डा. केपी सिंह की जमकर प्रशंसा की थी। जनता से वायदा किया था कि मल्हनी से चुनाव आप जिताओ मैं डा. केपी सिंह को प्रदेश का बड़ा नेता बनाऊंगा। लेकिन, मल्हनी की जनता ने गृहमंत्री के इस वायदे को पूरा नहीं किया।

नतीजा यह हुआ कि डा. केपी सिंह को 18319 मत मिले, जबकि उनसे ज्यादा मत बसपा के प्रत्याशी शैलेंद्र यादव को 24007, जेडीयू प्रत्याशी धनंजय सिंह को 79830 और चुनाव जीतने वाले सिटिंग विधायक लकी यादव को 97357 मत मिले। यानी इस सीट पर कुल 12 प्रत्याशियों में लकी यादव और धनंजय सिंह को छोड़कर किसी की जमानत नहीं बची, क्योंकि 227362 पड़े कुल मत का छठा हिस्सा भी 10 प्रत्याशी नहीं पा सके।
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