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प्रवासी मजदूरों ने बढ़ाई जिले में चुनौतियां

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जौनपुर। जिले में कोरोना का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पूर्वांचल में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों के जौनपुर आने के कारण कोरोना के संक्रमण का खतरा यहां सर्वाधिक है। अब तक 32 हजार से अधिक मजदूर जिले में ट्रेनों के जरिए आ चुके हैं। इसके अलावा बस, ट्रक, पैदल, साइकिल सहित अन्य साधनों से भी हजारों की तादाद में मजदूर रोज आ रहे हैं। इनकी न तो समुचित जांच हो रही है और न ही क्वारंटीन नियमों का ही सख्ती से पालन कराया जा रहा है। ऐसे में कोरोना के खतरे को लेकर हर कोई सहमा हुआ है। प्रशासन के सामने भी इन्हें राशन और काम उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है।
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कोरोना का संक्रमण सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और गुजरात में ही है। प्रवासी मजदूर भी इन्हीं राज्यों से यहां आ रहे हैं। श्रमिक स्पेशल ट्रेन भी इन्हीं राज्यों से आई हैं। आरंभ में तो स्टेशन पर थर्मल स्क्रीनिंग के बाद यात्रियों को होम क्वारंटीन में भेजा जा रहा था, मगर उनकी बड़ी तादाद को देखते हुए क्वारंटीन में रखने की व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई है। अब सीधे मजदूर घर पहुंच जा रहे हैं। ट्रेन के यात्रियों की तो फिर भी कहीं जांच भी हो जा रही है और यह रिकार्ड में भी दर्ज हो रहे हैं, मगर निजी साधनों या बस, ट्रकों से आने वालों का ब्योरा न प्रशासन के पास है और पुलिस और खूफिया इकाई के पास। ऐसे लोग सीधे गांव में आकर घर में घुस जा रहे हैं। परिजन भी उनकी जानकारी जानकारी छिपा रहे हैं। बाद में लक्षण मिलने पर सबकी जान जोखिम में पड़ रही है। दो मई को सरायख्वाजा में कोरोना पीड़ित पिकअप चालक का मामला हो या फिर खुटहन के शेखपुर सुतौली, रामनगर व रामपुर के गांवों का। हर जगह शुरुआत में जानकारी छिपाने की ही कोशिश की गई। बाद में किसी तरह सूचना मिलने पर उनके सैंपल की जांच कराई गई। तेजी से आते प्रवासी गांवों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं।
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