जौनपुर। कुछ दिनों पहले तक फरवरी-मार्च वाली गर्मी का अहसास करा रहे मौसम ने अचानक रंग बदल लिया है। बृहस्पतिवार को पारा लुढ़ककर सात डिग्री पर पहुंच गया। अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। दिनभर बादल छाए रहने और शीतलहर के झोंकों ने लोगों को ठिठुरा दिया। स्वेटर-जैकेट से शरीर ढंका होने के बाद गलन से राहत नहीं मिली। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटों के लिए कोल्ड-डे का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान तापमान तेजी से नीचे गिरने की आशंका बनी हुई है।
इस वर्ष मौसम लगातार रंग बदल रहा है। नवंबर के अंत तक गुलाबी ठंडी बनी रही। इसके बाद तापमान लुढ़कना शुरू हुआ, लेकिन दिसंबर के अंत में मौसम साफ हो गया। तापमान लगातार ऊपर चढ़ने लगा था। बीते सात जनवरी को अधिकतम तापमान 28 डिग्री तक पहुंच गया था। दिन की धूप चुभने लगी थी। आमतौर पर ऐसा मौसम मार्च में होता है। किसान भी फसलों की वृद्धि को लेकर चिंतित हो गए थे। अब फिर से मौसम ने करवट ली है। पिछले दो दिनों से शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। बृहस्पतिवार को तो पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे। मकर संक्रांति पर सूर्य के दर्शन के लिए भी लोग तरस गए। अधिकतम तापमान 17 तो न्यूनतम 7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। स्वेटर, जैकेट, टोपी, जूता-मोजा से पूरा शरीर ढंकने के बाद भी कंपकंपी बनी हुई थी। ठंड के असर से हाथ-पैर मानों सुन्न हो रहे थे। राहत के लिए जगह-जगह अलाव जलाकर लोग तापते रहे। सड़कों पर भी आम दिनों की अपेक्षा भीड़ कम थी।
72 घंटे तक पड़ेगी कड़ाके की ठंड
कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के मौसम वैज्ञानिक पंकज जायसवाल ने बताया कि मौसम विभाग ने कोल्ड डे का अलर्ट जारी किया है। जनपद के आसपास के क्षेत्र में अगले 72 घंटे कड़ाके की ठंड पड़ेगी। शीतलहर का प्रकोप बढ़ने के आसार हैं। इस दौरान गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग, बच्चों और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। वे घर से बाहर निकलने में परहेज करें और अगर बेहद जरूरी हो तो सिर, पांव, गला और नाक को ढंककर ही बाहर निकलें।
फसलों पर पाला का खतरा, किसान बरतें सावधानी
जौनपुर। तापमान में गिरावट के साथ फसलों के लिए भी संकट बढ़ गया है। पाला गिरने की आशंका है। ठंड और पाले की वजह से फसलों को काफी नुकसान पहुंच सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र बक्शा के पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि तापमान में गिरावट एवं पाले की वजह से अनाज और सब्जी के फसल की पत्तियां पीली होकर झुलसने लगती हैं। फूल गिरने लगते हैं। आलू की फसल में झुलसा बीमारी लगने की आशंका बढ़ जाती है। अरहर का फूल झड़ने लगता है और मटर की फसल में गेरुई रोग लगने लगता है, जिससे पत्तियां झुलसने लगती है। ऐसी स्थिति में किसानों को फसलों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सिकरारा क्षेत्र के शेरवां बाजार में ठंड से बचने के लिए अलाव तापते लोग।- फोटो : JAUNPUR