जौनपुर। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार की शाम टीडी कॉलेज में वैश्विक स्तर पर बढ़ता हिंदी का दायरा विषय पर वेबिनार में पूर्वांचल विवि की कुलपति प्रो. निर्मला एस. मौर्य ने कहा कि विश्व के अधिकांश देशों में आज हिंदी अध्ययन, अध्यापन और प्रशिक्षण के कार्यों से जुड़ी है। कई देशों में आकाशवाणी और दूरदर्शन के चैनलों पर हिंदी के कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने कहा कि विश्व के 600 से अधिक विवि, महाविद्यालय और विद्यालय में हिंदी का अध्ययन-अध्यापन हो रहा है। मीडिया और सिनेमा ने हिंदी को अंर्तराष्ट्रीय भाषा के उच्च सिंहासन पहुंचाने में सहयोग किया है। बीएचयू हिंदी विभाग के प्रो. वशिष्ठ अनूप ने कहा कि हिंदी का विकास तभी होगा, जब हम भारत की सभी भाषाओं का एक साथ भाषा दिवस मनाएं। जब तक क्षेत्रीय भाषाओं का विकास नहीं होगा तब तक हिंदी का विकास नहीं होगा। प्रयागराज विवि के एसोसिएट प्रो. डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी बोलने वालों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन उसमें साहित्य लिखने वालों की संख्या निरंतर घट रही है। प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, प्रबंधक अशोक कुमार सिंह, प्राचार्य डॉ. सरोज सिंह, विभागाध्यक्ष डॉ. सुषमा सिंह, डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, आईक्यूएसी के समन्वयक डॉ. आरपी गुप्त, कुंवर शेखर गुप्त, डॉ. वंदना दुबे, डॉ. आलोक सिंह, डॉ. राजदेव दुबे, डॉ. आरएन ओझा, डॉ. हरिओम त्रिपाठी, डॉ. गीता सिंह, डॉ. अजय कुमार दुबे, डॉ. ओम प्रकाश सिंह, डॉ. अवनीश सिंह, डॉ. अरुण कुमार सिंह शामिल रहे।
हिंदी से ही राष्ट्र का निर्माण संभव
सुजानगंज। श्री गौरीशंकर संस्कृत महाविद्यालय में हिंदी दिवस दो दिवसीय व्याख्यानमाला के अंतिम दिन प्रथम सत्र में विश्व भारती शांति निकेतन पश्चिम बंगाल के प्रोफेसर हरिश्चंद्र मिश्रा ने विचार रखा। हिंदी के मानक रूप को बताते हुए कहा कि हिंदी को किसी जाति या धर्म विशेष से लेकर नहीं चलना चाहिए। अगर ऐसा लेकर चलेंगे तो हिंदी और राष्ट्र का विकास संभव नहीं हो पाएगा। भाषा का विकास करने के लिए हमें हिंदी का मानकीकरण करना आवश्यक है। दूसरे सत्र में प्रयागराज विवि के प्रोफेसर राकेश सिंह ने व्याख्यान दिया। अध्यक्षता डॉ जयप्रकाश तिवारी और कार्यक्रम संयोजक प्राचार्य डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी ने आभार जताया।