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मल्हनी उपचुनाव: जीते कोई, बनेगा नया इतिहास

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जौनपुर। मल्हनी विधानसभा उपचुनाव के नतीजों का सबको इंतजार है। कोई भी जीते लेकिन यहां का चुनाव मल्हनी इलाके के इतिहास का एक नया अध्याय साबित होगा। तीन प्रमुख उम्मीदवारों में से जीत किसी की भी हो वह नया इतिहास बनाएगा।
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वर्ष 2012 से अस्तित्व में आई मल्हनी विधानसभा सीट पर अब तक सपा का कब्जा रहा है। वर्ष 2012 में सपा के पारसनाथ यादव निर्वाचित हुए थे। उन्हें वर्ष 2017 में भी बड़े अंतर से जीत मिली। उनके निधन के बाद हो रहे उपचुनाव में पुत्र लकी यादव सपा के टिकट पर मैदान में हैं। अगर लकी चुनाव जीतने में कामयाब हुए तो सपा की यहां हैट्रिक लग जाएगी। मल्हनी से पहले यह सीट रारी के नाम से जानी जाती थी। उस समय भी यहां से लगातार कोई पार्टी तीन बार नहीं जीत पाई।
भाजपा इस सीट पर खाता खोलने के लिए संघर्ष कर रही है। इसीलिए प्रदेश सरकार के कई मंत्रियों ने यहां डेरा डाल रखा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बार यहां से जनसभा की। वर्ष 1962 के चुनाव में रारी सीट से जनसंघ कुंवर श्रीपाल सिंह को जीत मिली थी। उसके बाद से यहां कभी केसरिया नहीं लहरा पाया। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा यहां से पिछड़ती ही रही है। पार्टी के प्रत्याशी मनोज सिंह जीतते है ंतो यह पार्टी के लिए नई उपलब्धि होगी। निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह रारी से दो बार विधायक चुके हैं। पहली बार वर्ष 2002 में भी वह निर्दल ही चुनाव जीतेे थे। इसके बाद वर्ष 2007 में जदयू प्रत्याशी के रूप में निर्वाचित हुए। वर्ष 2009 के उपचुनाव में पिता राजदेव सिंह बसपा से निर्वाचित हुए। वर्ष 2012 में उनकी पत्नी जागृति सिंह निर्दल और वर्ष 2017 में धनंजय निषाद पार्टी से चुनाव मैदान में उतरे लेकिन जीत नहीं सके। धनंजय सिंह को जीत मिलती है तो वह मल्हनी (रारी में भी धनंजय निर्दल जीत चुके हैं।) से जीतने वाले पहले निर्दल और तीन बार चुनाव जीतने वाले प्रत्याशी बन जाएंगे। कांग्रेस और बसपा भी सीट वापसी के प्रयास में लगी हैं।
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