मुंगराबादशाहपुर के मां काली मंदिर में चल रहे श्रीराम कथा के समापन अवसर पर अयोध्या के संत व्यास शिवानंद महराज ने कहा कि मानव को आजीवन राम कथा का रसपान करना चाहिए। निर्जीव को सजीव बनाना इसका प्रमुख गुण है। यह प्राणियों में चेतना का संचार कर देता है। सत्संग में निर्मल मन के साथ बैठना चाहिए।
यही कामयाब जीवन के लिए अचूक मंत्र है। इससे पूर्व माल्यार्पण कर कथावाचक शिवानंद जी का स्वागत किया गया। भक्तों ने आरती उतार कर उनसे आशीर्वाद लिया। कथा के दौरान मां के जयकारे से मंदिर परिसर गूंजता रहा। कृष्णगोपाल जायसवाल ने अतिथियों का स्वागत किया। समापन अवसर पर प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर उमाकांत केशरी, आकाश पटवा, गायत्री देवी, शिवकुमारी वर्मा, अर्चना तिवारी, पुष्पा केशरी, पूजा केशरी, सरोजलता वर्मा, दयाशंकर भगौती आदि मौजूद थे।
जलालपुर संवाददाता के अनुसार, क्षेत्र के बीबनमऊ गांव में चल रहे गायत्री महायज्ञ और मानस प्रवचन में कथा वाचक वशिष्ठ नारायण उपाध्याय ने कहा कि सत्संग से मनुष्य में अच्छे विचार आते हैं। माता कैकेई पर जब तक गुरु वशिष्ठ के सत्संग का प्रभाव रहा तब तक कैकेई राम और सीता से अपार प्रेम कर रही थी। जैसे ही कै केई का साथ मंथरा हुआ उनके मन में तमाम तरह की विकृतियां आ गई।
कहा कि कुसंग से ज्ञानी की बुद्धि भी भ्रष्ट हो जाती है। जीवन भजन और सत्संग ही मोक्ष का एक मात्र रास्ता है। शांतिकंज हरिद्वार के संत सालिकराम ने कहा कि जीवन में हर कर्ज अदा हो सकता है, पर माता पिता का कर्ज कभी नहीं। इस मौके पर त्रिलोचन चौबे, माला सिंह, बृराज सिंह, प्रदीप सेठ, शरद पांडेय, केके चौबे आदि मौजूद थे। राजेश मिश्र ने आभार जताया।