राज्य सेतु निगम की ओर से गोमती के छुंछे घाट पर निर्माणाधीन पुल बुधवार की रात नदी में गिर गया। ढलाई के महज आधे घंटे के अंदर ही दो पायों के बीच तकरीबन 30 मीटर लंबा निर्माण ढह गया।
संयोग था कि ढलाई गिरने के चंद मिनटों पहले ही नीचे काम कर रहे श्रमिक हट गए थे, नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। जानकारी मिलने के बाद सेतु निगम के कई उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचे और मुआयना कर चले गए।
गौरतलब है कि छबीलेपुर बाजार से बसालतपुर होते हुए सुखलामगंज को जोड़ने के लिए गोमती के छुंछे घाट पर 599.74 करोड़ की लागत से पुल निर्माण का कार्य चल रहा है।
राज्य सेतु निगम वर्ष 2010 से पुल निर्माण कार्य करवा रहा है। पुल के पाए तैयार कर लिए गए हैं। अब उन पर ढलाई का काम चल रहा है।
बुधवार की शाम श्रमिक और कारीगर दो पायों के बीच लगभग 30 मीटर ढलाई का काम पूरा करने के बाद चले गए। इसके आधे घंटे बाद ही पुल का नवनिर्मित हिस्सा नदी में गिर गया।
ढलाई को आधार देने के लिए लगाया गया लोहे का एंगिल समेत भारी मात्रा में सीमेंट, गिट्टी और बालू पानी में मिल गया। इससे वहां काम कर रहे श्रमिक सहम गए।
जानकारी मिलने के बाद विभाग के जीएमडी वाराणसी राकेश राजवंश डिप्टी प्रोडक्ट मैनेजर केएन ओझा, एई अनुपम तिवारी आदि अधिकारी बृहस्पतिवार को सुबह मौके पर पहुंचे और मुआयना करने के बाद चले गए।
मौके पर मौजूद श्रमिकों ने बताया कि फिलहाल काम रोक दिया गया है और नदी के पानी में गिरे मलबे को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उधर ग्रामीणों में पुल निर्माण कार्य में लापरवाही की चर्चा रही।
ग्रामीणों ने कहा कि पुल निर्माण को लेकर विभाग के अधिकारियों में खास दिलचस्पी नहीं दिख रही थी। जिलाधिकारी सुहास एलवाई का कहना है कि निर्माणाधीन पुल का गिरना, गुणवत्ता पर सवाल खड़े करता है।
अधिकारियों को भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।