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किसानों को खाद-बीज के लाले, समितियों पर बंद हैं ताले

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जौनपुर। खरीफ की खेती का समय शुरू हो गया है। किसान धान की नर्सरी डालने में जुटे हुए हैं। मौसम अनुकूल होने के कारण नर्सरी के तीव्र विकास के लिए उन्हें खाद की जरुरत है, मगर सहकारी समितियों पर ताले लटक रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल बीज का भी है। जिले की किसी भी समिति पर अब तक बीज नहीं पहुंचा है। जिम्मेदारों का कहना है कि उन्होंने डिमांड भेजी थी, लेकिन अभी प्राप्त नहीं हुई है। ऐसे हाल में किसान बाजार से महंगे दामों पर खाद-बीज खरीदने को मजबूर हैं। विडंबना है कि बाजार में उपलब्ध खाद-बीज के अधिक दाम देने के बाद भी गुणवत्ता का कोई भरोसा नहीं है।
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जिले में 8.16 लाख किसान हैं। इन्हें समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में समितियां स्थापित की गई हैं। कुल 204 सहकारी समितियों में से 39 समितियां बंद चल रही हैं। जो चालू हैं, उन पर भी आए दिन ताला ही लटका रह रहा है। खाद-बीज की अनुपलब्धता न होने से समितियों के सहारे बैठे किसानों को बाजार की शरण लेनी पड़ रही है। समितियों पर डीएपी की सरकारी दर 1150 रुपये और यूरिया 260 रुपये प्रति बोरी है। वहीं बाजार में इसके डेढ़ गुना दाम लिए जा रतहे हैं। किसानों का कहना है कि उच्चाधिकारियों तक शिकायत के बाद भी सुनवाई हीं हो रही। खेती का मुख्य सीजन होने के कारण मजबूरी में उन्हें अधिक दाम देकर खाद-बीज लेना पड़ रहा है। इससे उनमें मायूसी बनी हुई है।
विभाग का दावा, पर्याप्त मात्रा में है खाद
किसान भले ही समितियों के बंद होने और खाद-बीज न मिलने की शिकायत कर रहे हैं, मगर विभाग के रिकार्ड में सब कुछ ठीक है। सरकारी आंकड़े के मुताबिक 165 समितियां फिलहाल चालू हाल में हैं। इन पर 10307 एमटी डीएपी और 7841 एमटी यूरिया की खेप उपलब्ध है। किसान तय रेट देकर खाद प्राप्त कर सकते हैं। सिर्फ जदापुर, महिमापुर, हरिपुर, बेलापार, बढ़ौना, मंटूपुर, वासापुर, मेंहदी, बिथुआकला, फत्तूपुर की समिति पर खाद उपलब्ध नहीं है। बीज किसी भी समिति पर अब रतक नहीं आई है।
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सहकारी समिति पर आए दिन उर्वरक खत्म होने से किसानों को मजबूरी में बाजार का रुख करना पड़ता है। इसमें आर्थिक नुकसान तो होता ही है फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित होता है। दोयम दर्जे का माल मिलने से नुकसान उठाना पड़ जाता है।
-तेज प्रताप सिंह, पिलखिनी।
सहकारी समिति पर उर्वरक होने का भी क्या फायदा। वहां आए दिन ताला ही लगा रहता है। न चाहते हुए बाजार से खरीदारी करनी पड़ती है। विभाग हर साल ऐसे ही पर्याप्त खाद होने के दावे करता है, मगर किसानों को समय पर उपलब्ध नहीं करा पाता।
-सुनील राजभर, कुकुहां।
खरीफ फसलों की बुआई की शुरुआत हो गई है, मगर सहकारी समिति पर उर्वरकों की कमी पहले ही नजर आ रही है। छोटे किसानों को उर्वरक के लिए सहकारी समिति से लाभ नाम मात्र का ही मिल पाता है। साधन संपन्न लोग ही एकमुश्त खाद ले जाते हैं।
-उमेश पाल, कुकुहां।
समितियों से मिलने वाले खाद-बीज की गुणवत्ता विश्वसनीय होती है, मगर बाजार में अधिक पैसा देने के बाद भी कोई भरोसा नहीं है। इससे कई बार फसल भी खराब हो जाती है। इस वक्त खाद-बीज उपलब्ध रहता तो किसानों को काफी सहूलियत होगी।
-प्रकाश मौर्य, मनिहांगोविंदपुर।
80 क्विंटल बीज की डिमांड की गई थी, मगर अब तक आया नहीं है। समितियों पर खाद की कमी नहीं है। अगर किसी समिति के बंद रहने की शिकायत है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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- अखिलेश प्रताप सिंह, एआर कोऑपरेटिव।
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