जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में सभी स्तरों पर पाठ्य और शिक्षाविद का समग्र केंद्र बिंदु शिक्षा प्रणाली को रखने की पुरानी प्रथा से अलग वास्तविक समझ और ज्ञान की ओर ले जाना है। मातृभाषा में अधिगम अधिक प्रभावशाली है। उन्होंने ये बातें टीडी कॉलेज के शिक्षक शिक्षा विभाग की ओर से सोमवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 मातृभाषा में अधिगम पर आयोजित संगोष्ठी में कहीं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न स्तरों पर यह देखा गया है कि 2 वर्ष से 8 वर्ष के बीच बालक बहुत जल्दी भाषा सीखते हैं और इस उम्र के विद्यार्थियों को बहुत अधिक संज्ञानात्मक लाभ होता है। फाउंडेशन की शुरुआत और इसके बाद से ही बच्चों को विभिन्न भाषाओं को संवाद शैली में पढ़ाया जाए, जिससे उनकी समझ भी बढ़ेगी। विशिष्ट अतिथि प्रो. आरएन त्रिपाठी ने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों, क्षेत्रों और आकांक्षाओं, भाषावाद और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने की जरूरत को ध्यान रखते हुए त्रिभाषा फार्मूले को लागू किया जाना ही उचित होगा, लेकिन लचीलापन रखा जाना आवश्यक है। प्राचार्य डॉ. समर बहादुर सिंह ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान विभिन्न गतिविधियों में भाग लें। सचिव डॉ. सुधांशु सिन्हा ने कहा कि अधिकांश विद्यार्थी शास्त्रीय भाषा में शब्दावली के स्रोत व उद्भव को ढूंढने से लेकर भाषा के अंदर प्रभाव और अंतरों को समझने में सफल नहीं हो पाते। विद्यार्थियों को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में बोले जाने वाली भाषा को समझने की आवश्यकता है। संयोजक डॉ. अजय कुमार दुबे ने आभार जताया। संगोष्ठी की संयोजक डॉ. रीता सिंह ने मातृ भाषा शिक्षण पर बल दिया। अध्यक्षता प्रबंधक अशोक कुमार सिंह ने किया। संगोष्ठी में डॉ. श्रद्धा सिंह, डॉ. गीता सिंह, डॉ. वैभव सिंह आदि मौजूद रहे।